‘स्पिरिट’ पर शुल्क कटौती से उद्योग को समायोजन का अवसर मिलेगा: सीआईएबीसी
‘स्पिरिट’ पर शुल्क कटौती से उद्योग को समायोजन का अवसर मिलेगा: सीआईएबीसी
नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के तहत अगले 10 साल में आयात शुल्क में की जाने वाली चरणबद्ध कटौती से घरेलू उद्योग को धीरे-धीरे खुद को ढालने और मजबूत करने में मदद मिलेगी। स्पिरिट कंपनियों के शीर्ष संगठन कनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईएबीसी) ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।
सीआईएबीसी ने कहा कि स्कॉच व्हिस्की पर कम आयात शुल्क से उन भारतीय उत्पादकों को भी लाभ होगा जो स्कॉच को कच्चे माल के रूप में उपयोग कर ‘बॉटल्ड-इन-इंडिया’ उत्पाद तैयार करते हैं।
जुलाई से लागू होने वाले व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के अनुसार, भारत ब्रिटेन की ‘व्हिस्की’ और ‘जिन’ पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत करेगा और फिर इसे समझौते के दसवें वर्ष तक 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
सीआईएबीसी के महानिदेशक अनंत एस. अय्यर ने कहा कि आयातित स़्पिरिट पर शुल्क कटौती 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी, जिससे घरेलू उद्योग को समायोजन का पर्याप्त समय मिलेगा।
उन्होंने कहा कि स्कॉच व्हिस्की पर कम आयात शुल्क से उन भारतीय उत्पादकों को भी लाभ होगा जो स्कॉच का उपयोग ‘बॉटल्ड-इन-इंडिया’ उत्पादों के लिए करते हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क में कमी के साथ यह आवश्यक हो जाता है कि राज्यों की मौजूदा नीतिगत असंतुलनों को भी दूर किया जाए, जो कई बाजारों में तुलनीय भारतीय उत्पादों की तुलना में विदेश में बोतलबंद आयातित उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं।
दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम और केरल जैसे राज्यों में विदेश में बोतलबंद उत्पादों को पहले से ही कम शुल्क, कम ब्रांड पंजीकरण शुल्क, कम मूल्य वर्धित कर/बिक्री कर या बेहतर बाजार पहुंच जैसी सुविधाएं प्राप्त हैं।
भाषा योगेश अजय
अजय

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