वैश्विक अस्थिरता के बीच एफडीआई के लिए आर्थिक समीक्षा में बहुआयामी रणनीति का आह्वान
वैश्विक अस्थिरता के बीच एफडीआई के लिए आर्थिक समीक्षा में बहुआयामी रणनीति का आह्वान
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) आर्थिक समीक्षा में देश के निवेश माहौल को मजबूत करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया है। बृहस्पतिवार को पेश की गई समीक्षा के अनुसार भविष्य की मुख्य चुनौती वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की निरंतरता बनाए रखना है। इसके लिए ढांचागत और समसामयिक, दोनों कारकों पर ध्यान देना जरूरी है।
समीक्षा में कहा गया कि सुधारों के लिए अवसर अब भी उपलब्ध हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं बनी रहेगी। आर्थिक वृद्धि की कहानी का अगला अध्याय लिखने के लिए एफडीआई की चुनौती को अवसर में बदलना होगा और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
सरकार की स्पष्ट मंशा और बेहतर आर्थिक प्रबंधन के बावजूद, एफडीआई प्रवाह अपनी क्षमता से कम बना हुआ है। विशेष रूप से बुनियादी ढांचे की जरूरतों के लिए और अधिक निवेश की जरूरत है।
समीक्षा के अनुसार, अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय सुधार अनिवार्य हैं। इसके लिए एक लक्षित रणनीति विकसित करनी होगी, जो वैश्विक मूल्य श्रृंखला के प्रमुख केंद्रों की पहचान करे। साथ ही, एक ऐसा सरकारी तंत्र स्थापित करना होगा जो इन निवेशकों के साथ साझेदार के रूप में सीधे काम करे।
यह सीधा जुड़ाव विभिन्न एजेंसियों के बीच के मुद्दों को सुलझाने और समयबद्ध समाधान प्रदान करने में मदद करेगा। इसके अतिरिक्त, यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत न केवल आकर्षक प्रोत्साहन दे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि इन प्रोत्साहनों को विश्वसनीयता के साथ लागू किया जाए।
एक विशेष ‘कार्यबल’ बनाने का सुझाव भी दिया गया है। यह कार्यबल दुनिया की शीर्ष कंपनियों से संपर्क करेगा और भारत की खूबियों जैसे – स्थिरता, मजबूत अर्थव्यवस्था, निरंतर वृद्धि और बड़े बाजार को उनके सामने रखेगा। इससे लक्षित क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा मिल सकता है।
इसमें यह भी कहा गया कि सक्रिय कूटनीति के जरिये उक्त ताकतों के बारे में बताने से व्यापारिक शुल्क जैसी चुनौतियों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय

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