पीएलआई में शामिल इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनियां लाभ का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में कर रहींः रिपोर्ट

पीएलआई में शामिल इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनियां लाभ का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में कर रहींः रिपोर्ट

पीएलआई में शामिल इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनियां लाभ का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में कर रहींः रिपोर्ट
Modified Date: February 27, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: February 27, 2026 5:51 pm IST

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) वाहन क्षेत्र के लिए संचालित उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से स्वीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माताओं का उत्पादन पैमाना बढ़ा है लेकिन इससे प्रतिस्पर्धी ढांचे में असंतुलन भी पैदा हुआ है। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया।

शोध संस्थान ‘सेंटर फॉर डिजिटल इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च’ (सी-डीईपी) की यह रिपोर्ट कहती है कि पीएलआई योजना के दायरे में शामिल की गई कंपनियों को 13 से 16 प्रतिशत का अनुमानित लागत लाभ मिलता है, जिससे वे आक्रामक मूल्य निर्धारण और तेज क्षमता विस्तार कर पा रही हैं।

हालांकि, कंपनियां इस लाभ का इस्तेमाल निर्यात-उन्मुख प्लेटफॉर्म विकसित करने के बजाय मुख्य रूप से घरेलू बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में ही कर रही हैं।

सी-डीईपी ने कहा कि गैर-पीएलआई इलेक्ट्रिक दोपहिया (ई2डब्ल्यू) विनिर्माताओं की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 के 407 प्रतिशत के सकारात्मक स्तर से घटकर 2023-24 में 33 प्रतिशत नकारात्मक रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह और भी गिरकर 11 प्रतिशत नकारात्मक हो गई।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लागत अंतर ने बाजार संरचना को विकृत कर दिया है, जिससे पीएलआई लाभार्थी घरेलू बाजार हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं, जबकि शुरुआती चरण में बाजार विकसित करने में अहम भूमिका निभाने वाली नवाचार-आधारित कंपनियां हाशिये पर जा रही हैं।

निर्यात के मोर्चे पर यह रिपोर्ट कहती है कि भारत के कुल इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्यात का 77 प्रतिशत हिस्सा गैर-पीएलआई मॉडलों से आता है, जबकि लागत लाभ के बावजूद पीएलआई-स्वीकृत मॉडल की कुल निर्यात में हिस्सेदारी एक-चौथाई से भी कम है।

सी-डीईपी के अध्यक्ष जयजीत भट्टाचार्य ने कहा, ‘मौजूदा स्वरूप में यह योजना उत्पादन बढ़ाने में मददगार है, लेकिन शोध एवं विकास (आरएंडडी) और नई प्रौद्योगिकी में निवेश करने वाली कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू स्तर पर दबाव के कारण भारत नेपाल, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे पारंपरिक दोपहिया निर्यात बाजारों को याडेया और सुनरा जैसी चीनी ईवी कंपनियों के हाथों गंवा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत दिसंबर 2025 तक कुल 3,754 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 2,321.94 करोड़ रुपये का ही वितरण हुआ।

सी-डीईपी ने नवाचार-आधारित कंपनियों के लिए लक्षित प्रोत्साहन खिड़की खोलने, ‘पहले आओ-पहले पाओ’ व्यवस्था लागू करने और समय-समय पर प्रदर्शन की समीक्षा कर निष्क्रिय लाभार्थियों को बाहर करने की सिफारिश की है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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