अदालत की फटकार के बाद एफडीए ने वापस लिया सिप्ला के दवा बिक्री लाइसेंस को रद्द करने का आदेश

अदालत की फटकार के बाद एफडीए ने वापस लिया सिप्ला के दवा बिक्री लाइसेंस को रद्द करने का आदेश

अदालत की फटकार के बाद एफडीए ने वापस लिया सिप्ला के दवा बिक्री लाइसेंस को रद्द करने का आदेश
Modified Date: August 29, 2026 / 03:14 pm IST
Published Date: August 29, 2026 3:14 pm IST

मुंबई, 29 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय की फटकार के बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे स्थित कैरी एंड फॉरवर्डिंग इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस निरस्त करने का आदेश शनिवार को वापस ले लिया।

अदालत ने नियामक से कहा कि उसने मामले में हद पार कर दी और मनमाने तरीके से कार्रवाई की।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि एफडीए की कार्रवाई ‘‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’’ के खिलाफ है।

एफडीए ने कहा कि वह लाइसेंस रद्द करने का आदेश तत्काल वापस लेगा और कंपनी को नया कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। इसके बाद मामले में कारणों सहित नया आदेश पारित किया जाएगा।

नियामक ने पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की दवाओं के भंडारण एवं वितरण सुविधा का दवा बिक्री लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द कर दिया था। यह कार्रवाई ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग, भंडारण और वापसी से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में की गई थी।

सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज ने शुक्रवार शाम कहा था कि उसने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है। कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने शनिवार को पीठ को बताया कि एफडीए ने 26 अगस्त को विभाग के समक्ष सुनवाई के लिए कंपनी को प्रतिनिधि भेजने का निर्देश ईमेल के जरिये दिया था। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त सार्वजनिक अवकाश था।

पोंडा ने कहा, ‘‘उस दिन कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था और उसने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था। हालांकि, एफडीए ने सुनवाई का अवसर दिए बिना उसी दिन आदेश पारित कर दिया।’’

एफडीए की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता पी. पी. काकड़े ने कहा कि कानून कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं देता।

इस पर पीठ ने सवाल किया कि विभाग ने दवा कंपनी को ईमेल भेजकर सुनवाई के लिए प्रतिनिधि भेजने को क्यों कहा, वह भी राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश के दिन।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आप (एफडीए) सराहनीय और प्रशंसनीय काम कर रहे हैं, लेकिन अब आप हद से आगे जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपसे गलती हुई है और अब आपको इस मुद्दे का समाधान करना होगा।’’

भाषा यासिर पाण्डेय

पाण्डेय


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