महिला श्रमिकों के असंगठित रोजगार में होने की संभावना पुरुषों से अधिकः ईएसी-पीएम अध्ययन

महिला श्रमिकों के असंगठित रोजगार में होने की संभावना पुरुषों से अधिकः ईएसी-पीएम अध्ययन

महिला श्रमिकों के असंगठित रोजगार में होने की संभावना पुरुषों से अधिकः ईएसी-पीएम अध्ययन
Modified Date: June 23, 2026 / 09:34 pm IST
Published Date: June 23, 2026 9:34 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारत में महिला श्रमिकों के असंगठित रोजगार में होने की संभावना पुरुषों की तुलना में 4.8 प्रतिशत अंक अधिक है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक कार्यपत्र में यह जानकारी दी गई है।

यह आंकड़ा मुख्य रूप से महिलाओं के अवैतनिक पारिवारिक कार्य, घरेलू कामकाज और घर-आधारित उत्पादन में अधिक हिस्सेदारी को दर्शाता है जहां पर अक्सर औपचारिक अनुबंध नहीं होते हैं।

भारत में श्रम बाजार के संगठित होने पर केंद्रित इस अध्ययन में कहा गया है कि शिक्षा संगठित रोजगार का सबसे मजबूत निर्धारक बनकर उभरी है। स्नातक और उससे अधिक शिक्षित श्रमिकों के असंगठित काम में लगे होने की संभावना अशिक्षित श्रमिकों की तुलना में 43.8 प्रतिशत अंक कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी से भी असंगठित रोजगार की संभावना 4.8 प्रतिशत अंक घटती है। महिलाओं के मामले में उच्च शिक्षा नियमित वेतन वाले रोजगार की संभावना बढ़ाती है और आकस्मिक श्रम पर निर्भरता घटाती है।

उद्यम स्तर पर डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल का सीधा संबंध सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के बेहतर प्रदर्शन से जुड़ा पाया गया है। आईसीटी अपनाने के सूचकांक में एक इकाई की वृद्धि से श्रम उत्पादकता 76 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और उद्यम पंजीकरण की संभावना 83.4 प्रतिशत अंक बढ़ती है।

अध्ययन में कहा गया है कि आईसीटी के माध्यम से संगठित श्रम दायरे में आने का लाभ शहरी क्षेत्रों (85.7 प्रतिशत अंक) और सेवा क्षेत्र के उद्यमों (85.7 प्रतिशत अंक) में विशेष रूप से अधिक देखा गया।

इसके अलावा, पंजीकृत उद्यमों को औपचारिक कर्ज तक पहुंच की संभावना 6.9 प्रतिशत अंक अधिक पाई गई, जिसका सकारात्मक प्रभाव विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में देखा गया।

हालांकि, महिला स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए औपचारिक कर्ज तक पहुंच की संभावना पुरुषों की तुलना में 2.4 प्रतिशत अंक कम रहती है, लेकिन पंजीकरण की स्थिति में यह संभावना 5.6 प्रतिशत अंक तक बढ़ जाती है।

कार्यपत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि श्रमिक और उद्यम दोनों स्तर के सर्वेक्षणों को एक साझा विश्लेषणात्मक ढांचे में जोड़ने से श्रम बाजार की बेहतर समझ विकसित होती है।

यह अध्ययन आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण 2025 और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण, 2025 के आंकड़ों पर आधारित है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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