कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण खाद उद्योग की खरीफ सत्र के लिए सब्सिडी दर बढ़ाने की मांग
कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण खाद उद्योग की खरीफ सत्र के लिए सब्सिडी दर बढ़ाने की मांग
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण भारतीय उर्वरक संघ (एफएआई) ने सरकार द्वारा मौजूदा खरीफ सत्र के लिए तय पोषण आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों में बढ़ोतरी की मांग की है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
अप्रैल में, सरकार ने आने वाले 2025-26 खरीफ सत्र के लिए फॉस्फेट और पोटाश (पी एंड के) खाद पर 41,534 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी थी, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक थी।
खरीफ सत्र 2026 के लिए, सरकार ने नाइट्रोजन के लिए सब्सिडी दर 47.32 रुपये प्रति किलोग्राम, फॉस्फेट के लिए 52.76 रुपये प्रति किलोग्राम, पोटाश के लिए 2.38 रुपये प्रति किलोग्राम और सल्फर के लिए 3.16 रुपये प्रति किलोग्राम तय की थी।
सूत्रों के अनुसार, इफको, कोरोमंडल इंटरनेशनल, पारादीप फॉस्फेट्स, इंडियन पोटाश लिमिटेड और इंडोरामा जैसी खाद कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार को एफएआई के तहत बैठक की। इस बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से कच्चे माल की उपलब्धता और घरेलू खाद उत्पादन पर इसके संभावित असर की समीक्षा की गई।
कच्चे माल की कीमतों में 100 प्रतिशत से 200 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हुई है, और कई मुख्य आदान वस्तुओं की लागत तीन से चार गुना बढ़ गई है।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा सब्सिडी ढांचे के तहत कच्चे माल की मौजूदा कीमतों पर उत्पादन करना घरेलू उत्पादकों के लिए पूरी तरह से अव्यावहारिक है।
उन्होंने कहा कि एफएआई ने विशेष रूप से खरीफ सत्र (अप्रैल से प्रभावी) के लिए एनबीएस दरों में तत्काल संशोधन की मांग की है ताकि सत्र के बाद कीमतों में हुई बढ़ोतरी की भरपाई की जा सके।
वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल खाद उत्पादन 517.49 लाख टन था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पिछले वित्त वर्ष में भारत का यूरिया आयात 83 प्रतिशत बढ़कर 103.50 लाख टन हो गया।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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