पश्चिम एशिया संकट के बावजूद उर्वरक उत्पादन स्थिर, खरीफ के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद उर्वरक उत्पादन स्थिर, खरीफ के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद उर्वरक उत्पादन स्थिर, खरीफ के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात
Modified Date: April 30, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: April 30, 2026 6:21 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के बावजूद घरेलू यूरिया उत्पादन मार्च-अप्रैल में 37.49 लाख टन रहा, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। साथ ही खरीफ सत्र से पहले कमी को पूरा करने के लिए 37 लाख टन यूरिया आयात भी सुनिश्चित किया गया है। सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मार्च-अप्रैल के दौरान कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 62.37 लाख टन रहा जबकि आयात 15.39 लाख टन था।

पश्चिम एशिया पर जानकारी देने के लिए अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा, ‘‘ संकट के बाद भी उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बना हुआ है…। इस अवधि में लगभग 78 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाई गई है।’’

उन्होंने कहा कि भारत ने मार्च में 16.49 लाख टन और अप्रैल में 21 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया, जिससे कुल उत्पादन 37.49 लाख टन हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर है।

यूरिया की कमी को आयात के जरिये पूरा किया जा रहा है।

शर्मा ने कहा, ‘‘ हमने वैश्विक निविदा जारी कर लगभग 37 लाख टन यूरिया सुनिश्चित किया है।’’

मार्च-अप्रैल में डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का घरेलू उत्पादन 4.79 लाख टन, एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाशियम) 12.69 लाख टन और सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) 7.40 लाख टन रहा। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए 19 लाख टन की वैश्विक निविदा भी जारी की गई है और कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है और आपूर्ति मांग से अधिक है।

खरीफ 2026 के लिए 390.45 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले मौजूदा भंडार 193.38 लाख टन है जो कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत है। यूरिया की उपलब्धता 73.81 लाख टन और डीएपी की 23.47 लाख टन है जबकि अन्य उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि यह बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक का परिणाम है। राज्यों में आपूर्ति की स्थिति मजबूत बनी हुई है। साथ ही उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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