वैश्विक चुनौतियों के बीच चौथी तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों की स्थिर वृद्धि
वैश्विक चुनौतियों के बीच चौथी तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों की स्थिर वृद्धि
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) रोजमर्रा के उपभोग के सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों की वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में स्थिर मांग के बीच वृद्धि मजबूत रही।
हालांकि, पश्चिम एशिया के बाजारों में जारी भू-राजनीतिक तनाव चिंता का विषय बना हुआ है।
मैरिको, डाबर और एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस (पूर्व में अदाणी विल्मर) जैसी कंपनियों ने मात्रा और मूल्य दोनों में वृद्धि दर्ज की है।
यह बढ़ोतरी मूल्य निर्धारण में बदलाव, विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में गति, मजबूत घरेलू खपत और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वृद्धि के कारण संभव हुई है।
कंपनियों को उम्मीद है कि महंगाई में कमी आने से मार्जिन में सुधार होगा। हालांकि वे आने वाली तिमाहियों को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी बनी हुई हैं।
उनका मानना है कि स्थिर आर्थिक परिस्थितियों और बेहतर खपत रुझानों के कारण घरेलू मांग में सुधार जारी रहेगा।
घरेलू कंपनी मैरिको ने अपनी की तिमाही की जानकारी में बताया कि इस अवधि में उसकी एकीकृत आय में सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत के आसपास वृद्धि हुई है।
यह वृद्धि मूल्य निर्धारण उपायों, केश तेल श्रेणी में मजबूत प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में बेहतर मांग से संभव हुई।
डाबर ने भी अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन दर्ज करते हुए मार्च तिमाही में मध्यम एकल अंक की आय वृद्धि का अनुमान जताया है।
कंपनी ने कहा कि घरेलू मांग में क्रमिक सुधार देखा गया और भारत में उसका त्वरित उपभोग वस्तु कारोबार उच्च एकल अंक की वृद्धि दर्ज कर सकता है।
डाबर के अनुसार, भारत में मजबूत प्रदर्शन ने उसके कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेषकर पश्चिम एशिया में चुनौतियों की भरपाई की, जहां बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण मांग और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई।
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेसने बताया कि ऑनलाइन व्यापार, त्वरित आपूर्ति और आधुनिक व्यापार जैसे वैकल्पिक खुदरा माध्यमों में चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, एफएमसीजी क्षेत्र बाहरी जोखिमों पर नजर रख रहा है, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर। पश्चिम एशिया संकट की वजह से एफएमसीजी क्षेत्र की मांग प्रभावित हो सकती है, आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है और लागत बढ़ सकती है।
भाषा अजय योगेश
अजय

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