एफआरएआई की सरकार से नकली व अवैध उत्पादों पर सख्ती बढ़ाने की मांग

एफआरएआई की सरकार से नकली व अवैध उत्पादों पर सख्ती बढ़ाने की मांग

एफआरएआई की सरकार से नकली व अवैध उत्पादों पर सख्ती बढ़ाने की मांग
Modified Date: June 24, 2026 / 05:00 pm IST
Published Date: June 24, 2026 5:00 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) फेडरेशन ऑफ रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) ने सरकार से अवैध व्यापार एवं नकली उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का बुधवार को आग्रह किया।

संघ ने कहा कि इनका बढ़ता प्रसार उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा है और लाखों छोटे खुदरा व्यापारियों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहा है।

एफआरएआई ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक संगोष्ठी में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को एक ज्ञापन सौंपकर अवैध व्यापार एवं नकली उत्पादों पर रोक लगाने के लिए कड़े नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

संघ ने अवैध उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कठोर दंड, डिजिटल मार्केटप्लेस की अधिक जवाबदेही, बेहतर निगरानी और बाजार निरीक्षण व्यवस्था तथा प्रवर्तन एवं नियामक एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और निष्पक्ष बाजार व्यवस्था को बढ़ावा मिल सके।

एफआरएआई ने खाद्य एवं पेय पदार्थ, किराना, व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन, तंबाकू उत्पाद, सिगरेट, ई-सिगरेट, नए निकोटीन उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान जैसी कई श्रेणियों में नकली तथा मानकों का पालन न करने वाले उत्पादों में ‘‘चिंताजनक वृद्धि’’ की ओर ध्यान दिलाया।

इस कार्यक्रम में सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अवैध व्यापार, नकली और तस्करी के उत्पाद सीधे तौर पर उपभोक्ताओं, कारोबार तथा परिवारों को प्रभावित करते हैं।

उन्होंने उद्योग, व्यापारियों, नागरिकों और प्रवर्तन एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

खंडेलवाल ने कहा, ‘‘ सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रौद्योगिकी नकली उत्पादों से लड़ने में एक शक्तिशाली साधन बन सकती है। साथ ही पारदर्शी व भरोसेमंद खुदरा व्यवस्था बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी महत्वपूर्ण है।’’

एफआरएआई के महासचिव विनय कुमार ने कहा कि अवैध व्यापार अब केवल व्यावसायिक चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह उपभोक्ता संरक्षण और आजीविका से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

उन्होंने कहा, ‘‘ नकली तथा अवैध स्रोतों से आए उत्पाद उपभोक्ताओं को असुरक्षित एवं घटिया वस्तुओं के संपर्क में लाते हैं और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को कमजोर करते हैं। लाखों छोटे खुदरा विक्रेता ऐसे माहौल में प्रतिस्पर्धा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जहां अवैध उत्पाद बिना रोक-टोक के बाजार में उपलब्ध हैं।’’

‘आधुनिक बाजारों में अवैध व्यापार से मुकाबला’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में प्रतिभागियों ने डिजिटल व त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) मंच के तेजी से बढ़ते विस्तार से उत्पन्न नई चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जहां ये मंच उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक हैं, वहीं दूसरी ओर उत्पादों की प्रामाणिकता एवं आपूर्ति श्रृंखला के अनुपालन की निगरानी को जटिल बना देते हैं।

प्रतिभागियों ने नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए जवाबदेही और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला संतुलित नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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