भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ढांचा निर्यातकों को शुल्क मोर्चे पर निश्चितता प्रदान करेगा:विशेषज्ञ

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ढांचा निर्यातकों को शुल्क मोर्चे पर निश्चितता प्रदान करेगा:विशेषज्ञ

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ढांचा निर्यातकों को शुल्क मोर्चे पर निश्चितता प्रदान करेगा:विशेषज्ञ
Modified Date: February 9, 2026 / 12:59 pm IST
Published Date: February 9, 2026 12:59 pm IST

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप दिए जाने से घरेलू निर्यातकों को शुल्क के मोर्चे पर तत्काल निश्चितता और बेहतर समझ मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह बात कही।

अमेरिका इस पेश रूपरेखा के अनुसार भारत पर लगाए जाने वाले जवाबी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। इससे पहले वह रूसी कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटा चुका है।

भारत पर लगाया गया शुल्क चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सबसे कम है।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के साझेदार रुद्र कुमार पांडे ने कहा कि यह रूपरेखा हालिया शुल्क युक्तिकरण पर अत्यंत आवश्यक परिचालन स्पष्टता प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि रूपरेखा स्पष्ट रूप से पुष्टि करती है कि वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक व रबर, कार्बनिक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद तथा चयनित मशीनरी क्षेत्रों सहित कई प्रमुख भारतीय निर्यात क्षेत्रों पर 18 प्रतिशत की जवाबी शुल्क दर लागू होगी।

पांडे ने कहा, ‘‘ निर्यातकों के लिए यह रूपरेखा तत्काल निश्चितता और बेहतर समझ प्रदान करती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 18 प्रतिशत शुल्क भारत को बांग्लादेश, थाईलैंड, इंडोनेशिया और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी निर्यातकों की तुलना में सापेक्ष लाभ की स्थिति में रखता है। इन देशों पर अमेरिकी शुल्क अपेक्षाकृत अधिक हैं।”

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार हिस्सेदारी में क्रमिक वृद्धि की उचित संभावना है।

पांडे ने कहा कि ऊर्जा, विमान एवं विमान कलपुर्जों, पूंजीगत वस्तुओं तथा प्रौद्योगिकी उत्पादों सहित पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद की भारत की घोषित मंशा को बुनियादी ढांचा विस्तार, विमानन वृद्धि और डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप रणनीतिक आयात प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाना चाहिए।

डेलॉयट इंडिया के साझेदार गुलजार डिडवानिया ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने पर ध्यान देने से दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा।

डिडवानिया ने कहा, ‘‘ वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति में यह समग्र रूप से एक अत्यंत सकारात्मक विकास है और इससे भारतीय निर्यातकों को तात्कालिक तथा दीर्घकालिक दोनों ही अवधि में लाभ होगा।’’

समझौते का स्वागत करते हुए फ्लोरेंस शू कंपनी के चेयरमैन एवं ग्रैंड अटलांटिया पनपक्कम एसईजेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अकील पनारुना ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के जूता एवं चमड़ा क्षेत्र के लिए बड़ा प्रोत्साहन है।

उन्होंने कहा कि पहले भारतीय जूता निर्यात पर अमेरिका में 50 प्रतिशत तक शुल्क लगता था जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता एवं दीर्घकालिक ‘सोर्सिंग’ प्रभावित होती थी।

अकील ने कहा, ‘‘ नए समझौते से शुल्क युक्तिकरण, बाजार पहुंच की बहाली और भारतीय निर्माताओं को आत्मविश्वास के साथ निर्यात बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।’’

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा, ‘‘ हम तमिलनाडु के पनपक्कम में अपने 2,500 करोड़ रुपये के संयुक्त उद्यम का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। इसमें हमारे ताइवानी साझेदार शामिल हैं जो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े ‘एथलेटिक फुटवियर’ उत्पादकों में से हैं।”

उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन यह इकाई अप्रैल तक पूरी होने की उम्मीद है। साथ ही भविष्य में भी निवेश की योजना है और परिवार संचालित चमड़ा कारोबार का विस्तार जारी रहेगा।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में