Liv-52 Tablet Scam: लिवर ठीक करने के लिए आप भी लेते हैं Liv-52 टैबलेट, तो हो जाएं सावधान, बाजार में बिक रही नकली दवाई, पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़

Liv-52 Tablet Scam: लिवर ठीक करने के लिए आप भी लेते हैं Liv-52 टैबलेट, तो हो जाएं सावधान, बाजार में बिक रही नकली दवाई, पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़

Liv-52 Tablet Scam/Image Credit: IBC24.in

Modified Date: February 9, 2026 / 02:09 pm IST
Published Date: February 9, 2026 2:09 pm IST

Liv-52 Tablet Scam: गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नकली दवाइयों के अवैध कारोबार का भंड़फोड़ किया गया है। स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और थाना मुरादनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में लिवर की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली Liv-52 (लिव-52) नामक दवा की भारी मात्रा में नकली खेप बरामद की गई है। इस मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि, ये आरोपी लंबे समय से नकली दवा बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहे थे।

दवा कंपनी की शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, एक नामी दवा कंपनी ने मुरादनगर थाना में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि, कुछ लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों में उपयोग होने वाली Liv-52 दवा की नकली टैबलेट तैयार कर फर्जी दस्तावेजों, फर्जी जीएसटी नंबर व नकली औषधि लाइसेंस के सहारे बाजार में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं शिकायत में ये भी कहा गया है कि, नकली दवाइयां ट्रांसपोर्ट के जरिए अलग-अलग जगहों और शहरों पर भेजी जा रही हैं।

पांच आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे

शिकायत दर्ज करने के बाद पुलिस ने अलग-अलग टीमों का गठन किया और जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रविवार को स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और मुरादनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयंक अग्रवाल, अनुप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी के रूप में हुई है।

50 हजार से ज्यादा टैबलेट जब्त

पुलिस ने आरोपियों के पास से Liv-52 की 50 हजार नकली टैबलेट, 500 रेपर शीट, 1200 हरे रंग के ढक्कन, 1200 सफेद प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार बरामद की। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि, बेहद कम लागत में नकली दवाएं तैयार की जाती थी। एक डिब्बी टैबलेट की लागत करीब 35 से 40 रुपये आती थी, जिसे वे करीब 100 रुपये में बाजार में बेचते थे। जबकि असली दवा की कीमत इससे कहीं ज्यादा होती है। गिरोह द्वारा डिब्बी, ढक्कन और रेपर अलग-अलग जगहों से तैयार कराए जाते थे।

लिवर पर पड़ सकता था असर

वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार Liv-52 जैसी दवा लिवर की सुरक्षा, पाचन सुधार, फैटी लिवर, शराब के सेवन से होने वाले नुकसान और भूख न लगने जैसी समस्याओं में उपयोग की जाती है। ऐसी स्थिति में यदि मरीजों को नकली दवा मिलती, तो बीमारी ठीक होने के बजाय लिवर को गंभीर नुकसान भी हो सकता था। इसी कारण यह मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। अब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। जबकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य 6 वांछित आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकली दवाइयों के इस गोरखधंधे को पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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