एफएसएसएआई का ‘एनालॉग उत्पाद को पनीर के रूप’ में बनाने, बेचने से रोक का प्रस्ताव
एफएसएसएआई का ‘एनालॉग उत्पाद को पनीर के रूप’ में बनाने, बेचने से रोक का प्रस्ताव
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने खाने-पीने की चीजों में मिलावट और गुमराह करने वाले दावों पर सख्ती बढ़ाते हुए ‘पनीर जैसे दिखने वाले एनालॉग उत्पाद’ को बनाने और बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया है।
एनालॉग पनीर कोई डेयरी उत्पाद नहीं है और यह ऐसी चीजों से बनता है जो दूध से नहीं मिलतीं।
एफएसएसएआई ने ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर रोक और पाबंदियां) संशोधन नियम, 2026’ का मसौदा जारी किया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कहा, ‘‘यह संशोधन… पनीर जैसे दिखने वाले एनालॉग उत्पाद के बनाने और बेचने पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित है, ताकि ग्राहकों को उत्पाद की प्रकृति और बनावट के बारे में गुमराह होने से बचाया जा सके।’’
कई राज्यों ने पहले ही एनालॉग पनीर पर रोक लगा दी है।
‘डेयरी संदर्भ में एनालॉग’ श्रेणी के तहत पहले से लाइसेंस या पंजीकृत उत्पाद को अपने नाम, लेबलिंग या विपणन में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।
एफएसएसएआई ने ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर रोक और पाबंदियां) नियम, 2011’ में संशोधन करने वाले मसौदा नियमों पर आपत्तियों या सुझावों के लिए अंशधारकों को 60 दिन का समय दिया है।
डेयरी के संदर्भ में, एनालॉग एक ऐसा खाद्य है जो दूध या दूध से बने उत्पाद जैसा दिखता है, उसका स्वाद वैसा ही होता है।
पिछले छह महीनों में, एफएसएसएआई ने गुमराह करने वाले दावों व लेबलिंग और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं और अन्य नियमों के उल्लंघन के लिए खाद्य व्यवसाय परिचालकों (एफबीओ) और ई-कॉमर्स मंच के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है।
बुधवार को, नियामक ने ई-कॉमर्स मंच अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिग बास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और जेप्टो के खिलाफ कई तरह के नियमों का पालन न करने, जिसमें गुमराह करने वाले दावे और प्रतिबंधित उत्पाद की बिक्री शामिल है, के लिए दंडात्मक कार्रवाई शुरू की।
इसने एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और शराब बनाने वाली कंपनियों पर भी सख्ती की है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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