एफएसएसएआई का पंजीकरण हमेशा के लिए मान्य, बार-बार नवीनीकृत कराने की ज़रूरत नहीं

एफएसएसएआई का पंजीकरण हमेशा के लिए मान्य, बार-बार नवीनीकृत कराने की ज़रूरत नहीं

एफएसएसएआई का पंजीकरण हमेशा के लिए मान्य, बार-बार नवीनीकृत कराने की ज़रूरत नहीं
Modified Date: March 13, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: March 13, 2026 9:57 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने शुक्रवार को कहा कि उसके पंजीकरण प्रमाणपत्र और लाइसेंस हमेशा के लिए मान्य रहेंगे और उनका नवीनीकरण कराने की ज़रूरत नहीं होगी। यह कदम ‘कारोबार करने की आसानी’ को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सुधारों का हिस्सा है।

एक बयान में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बताया कि उसके नोडल स्वास्थ्य मंत्रालय ने कई सुधारों को मंज़ूरी दी है। इनमें पंजीकरण के लिए कारोबार की सीमा को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करना शामिल है, जो 10 मार्च से लागू होगा। नगर निगमों में पंजीकृत सड़क किनारे के खाद्य बिक्रेता को एफएसएसएआई के साथ भी पंजीकृत माना जाएगा।

एफएसएसएआई ने कहा, ‘‘मज़बूत खाद्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करते हुए ‘कारोबार करने की आसानी’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई व्यापक नियामक और प्रक्रियागत सुधारों को मंज़ूरी दी है।’’

ये सुधार राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और अंशधारकों के साथ विस्तार से चर्चा करने के बाद तय किए गए हैं। ये सुधार, नीति आयोग द्वारा गठित ‘गैर-वित्तीय नियामकीय सुधार पर उच्च-स्तरीय समिति’ की सिफ़ारिशों के अनुरूप हैं।

नियामक ने कहा, ‘‘नियामकी बोझ को कम करने के लिए, एफएसएसएआई के पंजीकरण और लाइसेंस की हमेशा के लिए मान्यता के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई है। पहले, पंजीकरण और लाइसेंस को समय-समय पर नवीनीकृत कराना पड़ता था। नई व्यवस्था के तहत, पंजीकरण और लाइसेंस हमेशा के लिए मान्य रहेंगे।

पहले, पंजीकरण और लाइसेंस एक साल से लेकर पांच साल तक के लिए जारी किए जाते थे।

एफएसएसएआई ने बताया कि इस सुधार से खाद्य व्यवसाय परिचालकों (एफबीओ) के लिए अनुपालन की लागत, कागज़ी कार्रवाई और लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ बार-बार बातचीत करने की ज़रूरत काफ़ी कम हो जाएगी।

अन्य सुधारों में, एफएसएसएआई ने कहा कि एक अप्रैल, 2026 से, ‘‘पंजीकरण के लिए कारोबार की सीमा को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। ’’

भाषा राजेश राजेश पाण्डेय

पाण्डेय


लेखक के बारे में