इस साल भू-आर्थिक संघर्ष सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम, भारत में साइबर असुरक्षा सबसे बड़ा खतरा

इस साल भू-आर्थिक संघर्ष सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम, भारत में साइबर असुरक्षा सबसे बड़ा खतरा

इस साल भू-आर्थिक संघर्ष सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम, भारत में साइबर असुरक्षा सबसे बड़ा खतरा
Modified Date: January 14, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: January 14, 2026 6:22 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) भू-आर्थिक संघर्ष 2026 में दुनिया के सामने सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभरा है, जबकि भारत के लिए ‘साइबर असुरक्षा’ सबसे बड़ा खतरा है। बुधवार को जारी एक नए अध्ययन में यह बात कही गई।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने दावोस वार्षिक बैठक से पहले अपनी वार्षिक ‘वैश्विक जोखिम रिपोर्ट’ जारी करते हुए कहा कि दो साल के लिए भू-आर्थिक टकराव आठ स्थान ऊपर चढ़कर वैश्विक स्तर पर शीर्ष जोखिम बन गया है।

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इसके बाद गलत सूचना और भ्रामक जानकारी, सामाजिक ध्रुवीकरण, चरम मौसम और अंतर-राज्यीय संघर्ष का स्थान है। इसमें आगे कहा गया कि 10 साल के दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में चरम मौसम की घटनाएं सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। इसके अलावा जैव विविधता को नुकसान और पारिस्थितिकी तंत्र का पतन, गलत सूचना और भ्रामक जानकारी तथा एआई प्रौद्योगिकियों के प्रतिकूल परिणाम शामिल हैं।

भारत के मामले में अध्ययन ने शीर्ष पांच जोखिमों की पहचान की है, जो साइबर असुरक्षा, आय की असमानता, अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक नरमी और राज्य आधारित सशस्त्र संघर्ष हैं।

वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को युद्ध के एक नए मोर्चे के रूप में रेखांकित करते हुए डब्ल्यूईएफ ने कहा कि नदियों और जलाशयों पर नियंत्रण रखने वाली सरकारें पड़ोसी देशों की कीमत पर अपने स्वयं के लोगों के लिए पानी मोड़ने का लालच कर सकती हैं। ऐसे में दुनिया भर में जल सुरक्षा की चिंताएं बढ़ती रहने की आशंका है।

रिपोर्ट में कहा गया, ”अगले दशक के दौरान संभावित तनाव के बिंदुओं में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी घाटी, या अफगानिस्तान द्वारा कोश टेपा नहर का निर्माण शामिल हो सकता है, जो तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में अमु दरिया नदी के प्रवाह को कम कर सकता है।”

डब्ल्यूईएफ ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को सरकारों के लिए एक अच्छा उदाहरण बताया और कहा कि वे अपनी बैंकिंग प्रणालियों को अधिक आकर्षक और भविष्य के संभावित वैश्विक ऋण या व्यापक वित्तीय संकटों के प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए कदम उठा सकते हैं।

गलत सूचना और भ्रामक जानकारी से उत्पन्न जोखिमों पर रिपोर्ट में कहा गया कि ‘डीपफेक’ या डिजिटल रूप से बदले गए वीडियो, चित्र और ऑडियो रिकॉर्डिंग का प्रसार एक विशेष समस्या है। इसमें कहा गया है कि डीपफेक का राजनीति और चुनावी प्रक्रियाओं पर प्रभाव बढ़ गया है, और इनका हथियार के रूप में उपयोग लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास को कम कर सकता है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और राजनीतिक हिंसा या सामाजिक उथल-पुथल भड़क सकती है।

इसमें कहा गया, ”हाल ही में अमेरिका, आयरलैंड, नीदरलैंड, पाकिस्तान, जापान, भारत और अर्जेंटीना के चुनावों को सोशल मीडिया पर ऐसी मनगढ़ंत सामग्री से जूझना पड़ा है, जो काल्पनिक घटनाओं को चित्रित करती हैं या राजनीतिक उम्मीदवारों को बदनाम करती हैं, जिससे तथ्य और कल्पना के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।”

यह रिपोर्ट वैश्विक जोखिमों पर डब्ल्यूईएफ का प्रमुख प्रकाशन है और अब यह अपने 21वें संस्करण में है। इसके निष्कर्षों पर अगले सप्ताह दावोस में होने वाली मंच की वार्षिक बैठक में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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