सरकार ने जीसीसी के लिए अपना काम किया, अब उद्योग क्षमताएं बढ़ाएं: सीईए

सरकार ने जीसीसी के लिए अपना काम किया, अब उद्योग क्षमताएं बढ़ाएं: सीईए

सरकार ने जीसीसी के लिए अपना काम किया, अब उद्योग क्षमताएं बढ़ाएं: सीईए
Modified Date: July 9, 2026 / 12:35 pm IST
Published Date: July 9, 2026 12:35 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने बजट में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) को समर्थन देने के लिए कई उपायों की घोषणा कर अपना काम कर दिया है। अब उद्योग को कृत्रिम मेधा (एआई) से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए कौशल विकास, क्षमता निर्माण और नवाचार में निवेश करना चाहिए।

नागेश्वरन ने कहा कि एआई ने पुराने कारोबारी मॉडल को चुनौती दी है। इसके कारण नियमित, दोहराए जाने वाले और नियम-आधारित कार्य प्रभावित होने की संभावना है। केवल कम लागत पर आधारित कारोबारी मॉडल के समक्ष मौजूद जोखिमों को नजरअंदाज करना व्यावहारिक नहीं होगा।

उद्योग और सरकार के सहयोग की भूमिका का उल्लेख करते हुए सीईए ने कहा कि केंद्रीय बजट में जीसीसी के लिए ‘ट्रांसफर प्राइसिंग सेफ हार्बर’ व्यवस्था को सरल एवं विस्तारित कर उद्योग की काफी समय से लंबित मांग को पूरा किया गया है।

उन्होंने यहां ‘सीआईआई जीसीसी शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि संशोधित व्यवस्था में एक समान मार्जिन, काफी अधिक सीमा एवं कई वर्षों की अवधि के लिए तेज तथा अधिक भरोसेमंद मंजूरी का प्रावधान है, जिससे ऐसे केंद्रों के लिए कर संबंधी निश्चितता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने छह प्रमुख महानगरों से आगे बढ़कर छोटे व मझोले शहरों में जीसीसी के विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए एक राष्ट्रीय रूपरेखा भी शुरू की है।

नागेश्वरन ने कहा, ‘‘ यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि समान अवसर का भी विषय है। अवसर केवल कुछ महानगरों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।’’

उन्होंने हालांकि, इस बात पर भी जोर दिया कि केवल सरकारी नीतियों के बल पर इस क्षेत्र में भारत का नेतृत्व सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।

सीईए ने कहा, ‘‘ सरकार रनवे तैयार कर सकती है, लेकिन विमान नहीं उड़ा सकती। लागत-आधारित मॉडल से क्षमता-आधारित मॉडल और निष्पादन से नवाचार की ओर बढ़ने का काम कंपनियों और लोगों को करना होगा।’’

नागेश्वरन ने उद्योग से क्षमता निर्माण और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लागत प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर क्षमता-आधारित प्रतिस्पर्धा विकसित कर पाता है या नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई स्वयं न तो इन प्रणालियों का निर्माण करती है, न उन्हें लागू करती है और न ही उनका संचालन करती है। किसी न किसी को इन प्रणालियों की रूपरेखा तैयार करनी होती है, उन्हें प्रशिक्षित करना होता है, उनकी जांच करनी होती है, उनमें सुधार करना होता है और उनकी जवाबदेही तय करनी होती है। किसी को यह भी तय करना होता है कि इनका उपयोग कहां किया जाना चाहिए और कहां नहीं।’’

नागेश्वरन ने साथ ही आगाह करते हुए कहा कि सफलता आत्मसंतोष का कारण नहीं बननी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय के साथ भारत ने जो बढ़त हासिल की है, वह खत्म भी हो सकती है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देश अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं, लागत बढ़ रही है और कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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