सरकार ने खरीफ सत्र के लिए पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी 12 प्रतिशत बढ़ाकर 41,534 करोड़ रुपये की
सरकार ने खरीफ सत्र के लिए पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी 12 प्रतिशत बढ़ाकर 41,534 करोड़ रुपये की
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को राहत देने के लिए खरीफ सत्र 2026 के लिए फॉस्फेटिक एवं पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों पर सब्सिडी को 12 प्रतिशत बढ़ाकर 41,534 करोड़ रुपये कर दिया है।
खरीफ सत्र 2025 में सरकार ने पीएंडके उर्वरकों पर 37,216 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह उर्वरक सब्सिडी एक अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक की अवधि के लिए लागू रहेगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि खरीफ सत्र 2025 की तुलना में आगामी फसल सत्र के लिए देय सब्सिडी में 4,317 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने खरीफ सत्र 2026 के लिए पोषक तत्वों पर सब्सिडी दर तय की है। इसके तहत नाइट्रोजन पर 47.32 रुपये प्रति किलोग्राम, फॉस्फेट पर 52.76 रुपये प्रति किलोग्राम, पोटाश पर 2.38 रुपये प्रति किलोग्राम और सल्फर पर 3.16 रुपये प्रति किलोग्राम सब्सिडी दी जाएगी।
वर्ष 2010 से लागू ‘पोषक तत्व आधारित सब्सिडी’ (एनबीएस) योजना के तहत पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी पीएंडके उर्वरकों की 28 किस्मों के लिए दी जाती है।
वैष्णव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की कीमतों में कोविड काल से तेज बढ़ोतरी होने के बावजूद किसानों के लिए 50 किलोग्राम की बोरी का खुदरा मूल्य 1,350 रुपये पर स्थिर रखा गया है।
इसके अलावा, सरकार ने आयातित ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (टीएसपी) पर भी समान राहत देने, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) पर माल ढुलाई सब्सिडी जारी रखने और अमोनियम सल्फेट को इस योजना में शामिल करने जैसे अतिरिक्त कदमों को भी मंजूरी दी है।
खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एनबीएस और यूरिया सब्सिडी योजना के तहत कुल बजटीय प्रावधान लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।
डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे गैर-यूरिया उर्वरकों के खुदरा दाम कंपनियां तय करती हैं, जबकि सरकार उन्हें तय सब्सिडी देती है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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