सरकार ने 6,000 एमटीपीए दुर्लभ खनिज के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बोलियां आमंत्रित की

सरकार ने 6,000 एमटीपीए दुर्लभ खनिज के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बोलियां आमंत्रित की

सरकार ने 6,000 एमटीपीए दुर्लभ खनिज के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बोलियां आमंत्रित की
Modified Date: March 20, 2026 / 12:25 pm IST
Published Date: March 20, 2026 12:25 pm IST

नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ (आरईपीएम) की विनिर्माण प्रोत्साहन योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) क्षमता के दुर्लभ खनिज (चुंबक) विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय ने एकीकृत सिंटर्ड एनडीएफईबी (नियोडिमियम-आयरन-बोरोन) दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट) विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए लाभार्थियों के चयन हेतु प्रस्ताव आमंत्रण (आरएफपी) जारी किया है।

बोली से पूर्व बैठक सात अप्रैल को होगी जबकि बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई है। तकनीकी बोलियां 29 मई 2026 को खोली जाएंगी।

बोली प्रक्रिया केंद्रीय सार्वजनिक खरीद मंच के माध्यम से पारदर्शी न्यूनतम लागत प्रणाली के तहत ऑनलाइन संचालित की जाएगी, जिसमें दो चरण तकनीकी एवं वित्तीय बोली के शामिल होंगे।

इस योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल ने पिछले वर्ष नवंबर में मंजूरी दी थी। यह देश में एकीकृत आरईपीएम सुविधाओं की कुल 6,000 एमटीपीए विनिर्माण क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।

योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को पूंजी अनुदान एवं बिक्री-आधारित प्रोत्साहन दिए जाएंगे। प्रत्येक लाभार्थी को 600 एमटीपीए से 1,200 एमटीपीए के बीच क्षमता आवंटित की जाएगी जो 100 एमटीपीए के गुणकों में होगी।

सरकार ने पूंजी अनुदान के लिए 750 करोड़ रुपये व बिक्री-आधारित प्रोत्साहन के लिए 6,450 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा तीन सबसे कम बोली लगाने वालों को आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड से एनडीपीआर ऑक्साइड की सीमित सुनिश्चित आपूर्ति दी जाएगी जिससे प्रमुख कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

दुर्लभ खनिज विशेष रूप से एनडीएफईबी चुंबक, विद्युत वाहन, पवन टरबाइन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष एवं रक्षा क्षेत्रों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण घटक हैं।

यह पहल देश में पूर्ण घरेलू मूल्य श्रृंखला (एनडीपीआर ऑक्साइड प्रसंस्करण से लेकर तैयार चुंबक उत्पादन तक) विकसित करने में मदद करेगी जिससे चीन पर आयात निर्भरता कम होगी एवं भारत को वैश्विक दुर्लभ खनिज बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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