सरकार छह महीने बाद चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर सकती: बीआईएस महानिदेशक
सरकार छह महीने बाद चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर सकती: बीआईएस महानिदेशक
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) सरकार स्वैच्छिक आधार पर शुरू की गई चांदी के आभूषणों और वस्तुओं की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया की प्रभाविता का मूल्यांकन करने के बाद इनकी हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के बारे में विचार करेगी।
सरकार ने चार सितंबर को एक सितंबर से प्रभावी चांदी के आभूषणों और वस्तुओं के लिए स्वैच्छिक हॉलमार्किंग शुरू करने की घोषणा की। इसमें उपभोक्ताओं के हित में धातु की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक डिजिटल पहचान प्रणाली लागू की जाएगी।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने शुक्रवार को पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमें इसका मूल्यांकन करने के लिए कुछ समय चाहिए। छह महीने पर्याप्त होंगे। हम छह महीने तक इस पर गौर करेंगे और उसके बाद विचार करेंगे कि इसे अनिवार्य किया जाए या नहीं।’’
अधिकारी ने यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में की कि क्या सरकार चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने पर विचार कर सकती है।
बीआईएस भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसकी स्थापना बीआईएस अधिनियम 2016 के तहत वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन और गुणवत्ता प्रमाणन की गतिविधियों के सामंजस्यपूर्ण विकास और उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए की गई है।
तिवारी ने कहा कि सोने के आभूषणों की तरह इन्हें भी अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा रहा है क्योंकि छोटे स्तर पर लोग चांदी पिघलाकर आभूषण बनाते हैं और उन्हें अनिवार्य प्रमाणन के दायरे में लाना एक बड़ी चुनौती है।
एक अन्य सवाल के जवाब में तिवारी ने कहा कि ई-परिवहन के क्षेत्र में, बीआईएस ने कई मानक प्रकाशित किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने बैटरी चार्जिंग के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए मानक विकसित किए हैं। हम बैटरी अदला-बदली के लिए भी मानक बना रहे हैं। यह मसौदा चरण में है। अगर हमें ईवी को लोकप्रिय बनाना है, तो हमारे पास ईवी के लिए पेट्रोल पंप जैसा बुनियादी ढांचा होना चाहिए।’’
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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