एथनॉल क्षेत्र को कच्चा माल सुनिश्चित करने को सरकार पीडीएस में टूटे चावल की मात्रा घटाएगी :खाद्य सचिव
एथनॉल क्षेत्र को कच्चा माल सुनिश्चित करने को सरकार पीडीएस में टूटे चावल की मात्रा घटाएगी :खाद्य सचिव
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित अनाज में टूटे चावल के आवंटन को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष रखेगी। इससे एथनॉल क्षेत्र के लिए सालाना लगभग 90 लाख टन टूटा चावल उपलब्ध हो सकेगा।
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के सम्मेलन में चोपड़ा ने कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य एथनॉल उद्योग को साल भर कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति प्रदान करना है जिससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साबुत अनाज के भंडार पर इसकी निर्भरता कम हो जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। एथनॉल क्षेत्र को टूटे हुए चावल की निरंतर आपूर्ति यह सुनिश्चित करने में सहायक होगी।’’
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वर्तमान में वितरित अनाज में 25 प्रतिशत टूटे हुए चावल होते हैं जो 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रदान किए जाते हैं। नई योजना के तहत इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
प्रतिवर्ष वितरित होने वाले करीब 360-370 लाख टन चावल में से बचे हुए अतिरिक्त टूटे चावल को एथनॉल उत्पादकों, पशु आहार निर्माताओं और अन्य को नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा। पांच राज्यों में इसका प्रायोगिक परीक्षण पहले ही किया जा चुका है।
चोपड़ा ने बताया कि अगले साल से सरकार ‘डिस्टिलरी’ को एफसीआई का साबुत चावल देना बंद कर देगी। संशोधित खाद्य योजना से प्राप्त टूटा हुआ चावल प्राथमिक अनाज आधारित कच्चे माल के रूप में इसकी जगह लेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ एथनॉल आपूर्ति के अगले वर्ष से, एफसीआई का साबुत चावल इस क्षेत्र के लिए उपलब्ध नहीं होगा। इसके स्थान पर, हम टूटे हुए चावल की आपूर्ति की ओर बढ़ रहे हैं। एक ऐसा बदलाव जो एक साथ कई उद्देश्यों को पूरा करता है।’’
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव एक साथ कई हितों की पूर्ति करता है। यह पीडीएस लाभार्थियों द्वारा प्राप्त अनाज की गुणवत्ता में सुधार करता है। भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स के दबाव को कम करता है। साथ ही एथनॉल क्षेत्र को अधिक स्थिर, पूर्वानुमानित, साल भर चलने वाला कच्चा माल प्रदान करता है।
यह घोषणा वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के मद्देनजर की गई है। ब्रेंट क्रूड तीन सप्ताह पहले लगभग 60-70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, उसमें लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे भारत पर अपने एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को गति देने का दबाव फिर से बढ़ गया है।
चोपड़ा ने कहा कि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण पहले ही 2013 के 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे 2014 से अब तक देश को 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है और कच्चे तेल के आयात में 277 लाख टन की कमी आई है।
उन्होंने बताया कि भारत की एथनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के 420 करोड़ लीटर से बढ़कर अब लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। इसमें पिछले तीन वर्ष में ही 650 करोड़ लीटर की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब केवल आपूर्ति बढ़ाने के बजाय बाजार में अधिक एथनॉल उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रही है। इसके तहत 20 प्रतिशत से अधिक मिश्रण की अनुमति, डीजल में एथनॉल मिलाने और ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ (पेट्रोल के साथ-साथ एथनॉल मिश्रण ईंधन पर चलने वाले) वाहनों को बढ़ावा देने जैसे विकल्पों पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है और इस पर जल्द फैसला हो सकता है।
चोपड़ा ने कहा कि टूटे चावल से जुड़ा प्रस्ताव एक पुरानी समस्या का समाधान करेगा। वर्ष 2023 में चीनी उत्पादन कम होने और चावल उत्पादन को लेकर आशंका के कारण सरकार को ‘डिस्टिलरी’ को कच्चे माल की आपूर्ति सीमित करनी पड़ी थी, जिससे उद्योग प्रभावित हुआ था।
उन्होंने ‘डिस्टिलरी’ से मौजूदा एफसीआई चावल आवंटन को तेजी से उठाने की भी अपील की। इस वर्ष निर्धारित 52 लाख टन में से अब तक 21 लाख टन ही उठाया गया है। अतिरिक्त 20 लाख टन उपलब्ध है लेकिन रियायती मूल्य की अवधि 30 जून को समाप्त हो जाएगी।
एथनॉल उत्पादन के लिए मक्का को भी वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, खासकर ऐसी किस्मों को जो बिना सिंचाई के वर्षा आधारित जमीन पर उगाई जा सकती हैं। कृषि मंत्रालय ऐसी उच्च उत्पादक किस्में विकसित कर रहा है जो प्रति हेक्टेयर पांच से छह टन उपज दे सकती हैं।
चोपड़ा ने कहा कि फिलहाल एथनॉल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों, मुख्य रूप से मक्का से आता है।
वहीं एआईडीए के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि एथनॉल उद्योग देश द्वारा पहले से ही हासिल किए गए ई20 लक्ष्य से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री के निदेशक (डाउनस्ट्रीम) पी. एस. रवि ने एथनॉल उद्योग से भारत के जैव ईंधन कार्यक्रम के विस्तार में पेट्रोल मिश्रण से परे जाकर समर्थन देने का आह्वान किया।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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