Naxalite Paparao Surrenders: हमलों की योजना बनाने में माहिर.. जवानों को देता था चकमा, बस्तर के रग-रग से था वाकिफ, जानिए कौन है दुर्दांत नक्सली पापराव?
हमलों की योजना बनाने में माहिर.. जवानों को देता था चकमा, बस्तर के रग-रग से था वाकिफ, Naxalite Paparao Surrenders Paparao Kon hai
बीजापुर। Naxalite Paparao Surrenders छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर अब अंतिम लड़ाई जारी है। नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन से महज कुछ ही दिन पहले नक्सली लीडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। सभी ने कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। लंबे समय से सक्रिय पापा राव संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसके साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला। अब जब उसके सरेंडर की खबर आई है तो बस्तर के आदिवासी इलाकों में राहत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर पापा राव मुख्यधारा में आ गया तो नक्सलवाद की आखिरी कड़ी भी टूट जाएगी। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। पापा राव के मामले में सुरक्षा बलों की सफलता पूरे अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी होगी। 2025-26 में बस्तर में अब तक सैकड़ों नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। पापा राव का मामला अंतिम बड़ा कदम माना जा रहा है।
पापा राव का पूरा नाम और बैकग्राउंड क्या है?
Naxalite Paparao Surrenders पापा राव का असली नाम मंगू दादा या चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 वर्ष से अधिक उम्र का यह नक्सली 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर है और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप है।
जानें कौन है पापा राव?
- पापा राव पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) का एक प्रमुख चेहरा है
- माओवादी संगठन में ऑपरेशन से लेकर रणनीतिक मामलों में उसकी अहम भूमिका रही है
- वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव
- दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य
- बस्तर में कई बड़े नक्सली हमले की रणनीति तैयार करने में उसकी प्रमुख भूमिका रही है।
- छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।
दो साल के आंकड़े बता रहे हैं सफलता की कहानी
जनवरी 2024 से 22 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ में 535 नक्सली मारे गए, 2037 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 2871 नक्सलियों ने पुनर्वास किया। इस दौरान 266 मुठभेड़ें हुईं, 1321 हथियार और करीब 1500 लैंड माइन व आईईडी बरामद किए गए।
2 साल में सुरक्षा बलों की सफलता
- छत्तीसगढ़ में जनवरी 2024 से 22 मार्च 2026 तक 535 नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए
- 25 महीनों में 2037 नक्सली गिरफ्तार किए गए
- 2 सालों में ही 2871 नक्सलियों ने पुनर्वास किया
- छत्तीसगढ़ में 25 महीनों में 266 मुठभेड़ें हुईं
- सुरक्षा बल के जवानों ने 1321 हथियार जब्त किए
- 1500 के करीब लैंड माइंस व IED जब्त किए गए
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