सरकार यूपीआई की विदेश में उपस्थिति बढ़ाने पर काम कर रही है : वित्तीय सेवा सचिव

सरकार यूपीआई की विदेश में उपस्थिति बढ़ाने पर काम कर रही है : वित्तीय सेवा सचिव

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 02:10 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 02:10 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्रणाली ‘यूपीआई’ की वैश्विक पहुंच को अधिक से अधिक देशों खासकर पूर्वी एशिया में विस्तारित करने का प्रयास कर रहा है।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) वर्तमान में आठ देशों भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और फ्रांस में चालू है। विदेशों में भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क की स्वीकार्यता से भारतीय पर्यटक विदेशों में लेनदेन के लिए यूपीआई से भुगतान कर सकते हैं।

‘ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट’ में यहां नागराजू ने कहा कि यूपीआई की बदौलत भारत में डिजिटल लेनदेन लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने कुछ देशों में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। हम इसका और विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर पूर्वी एशिया में हमारा ध्यान केंद्रित है।’’

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव ने कहा कि दिसंबर 2025 में यूपीआई लेनदेन 21 अरब से अधिक हो गए और यूपीआई तथा डिजिटल लेनदेन की सफलता का श्रेय ‘पीएम जन धन योजना’ खातों में कई गुना वृद्धि के साथ-साथ इन खातों में औसत शेष राशि में वृद्धि को भी दिया जा सकता है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का संचालन करता है। इसका इस्तेमाल खरीदारी करते समय ग्राहकों के बीच या व्यापारियों द्वारा वास्तविक समय में भुगतान करने के लिए किया जाता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की एक पहल भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), भारत में खुदरा भुगतान एवं निपटान प्रणालियों (आईबीए) के संचालन के लिए एक प्रमुख संगठन है।

नागराजू ने लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों को मझोले उद्यमों में विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ देश में करोड़ों सूक्ष्म इकाइयां होने के बावजूद, वास्तव में सूक्ष्म इकाइयों का मझोले और बड़े उद्यमों में विकास नहीं हो रहा है। मेरा मानना ​​है कि यह तभी संभव होगा जब सूक्ष्म उद्यमों को भरपूर समर्थन, बाजार तक पहुंच और प्रौद्योगिकी एवं हार्डवेयर दोनों के माध्यम से बढ़ावा मिलेगा।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा