सरकार गरीबों, मध्यम वर्ग के लिए ‘सुधार एक्सप्रेस’ पर, जीएसटी से एक लाख करोड़ रुपये की बचत: मुर्मू

सरकार गरीबों, मध्यम वर्ग के लिए ‘सुधार एक्सप्रेस’ पर, जीएसटी से एक लाख करोड़ रुपये की बचत: मुर्मू

सरकार गरीबों, मध्यम वर्ग के लिए ‘सुधार एक्सप्रेस’ पर, जीएसटी से एक लाख करोड़ रुपये की बचत: मुर्मू
Modified Date: January 28, 2026 / 02:01 pm IST
Published Date: January 28, 2026 2:01 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि सरकार ‘सुधार एक्सप्रेस’ के पथ पर आगे बढ़ रही है जिससे गरीब एवं मध्यम वर्ग को लाभ हो रहा है। पिछले साल लागू किए गए ऐतिहासिक अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार ने नागरिकों के लिए एक लाख करोड़ रुपये की बचत सुनिश्चित की है।

संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि सरकार ने आयकर कानून में संशोधन किया है और 12 लाख रुपये तक की आय को कर से छूट देने का ‘ऐतिहासिक निर्णय’ लिया।

मुर्मू ने कहा, ‘‘ इन सुधारों से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अभूतपूर्व लाभ मिल रहे हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।’’

नया एवं सरलीकृत आयकर अधिनियम 2025 एक अप्रैल 2026 से लागू होगा। पिछले वर्ष एक फरवरी को प्रस्तुत 2025-26 के बजट में सरकार ने आयकर छूट की सीमा को पहले के सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया था।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ आज मेरी सरकार ‘सुधार एक्सप्रेस’ के पथ पर आगे बढ़ रही है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार पुराने नियमों एवं प्रावधानों में लगातार बदलाव किया जा रहा है।’’

जीएसटी 2.0 सुधार पर मुर्मू ने कहा कि ऐतिहासिक अगली पीढ़ी के सुधार ने नागरिकों को उत्साह से भर दिया है।

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के तहत 22 सितंबर 2025 से करीब 375 वस्तुओं की कर दरों में कटौती की गई थी।

मुर्मू ने कहा, ‘‘ इस सुधार से नागरिकों की एक लाख करोड़ रुपये की बचत हुई। जीएसटी में कमी के बाद, 2025 में दोपहिया वाहनों का पंजीकरण दो करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।’’

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ने 22 सितंबर, 2025 से दो स्तरीय संरचना अपना ली है। इसके तहत अधिकतर वस्तुओं व सेवाओं पर क्रमशः पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर लगता है। अति विलासिता की वस्तुओं और तंबाकू एवं संबंधित उत्पादों पर 40 प्रतिशत कर लगाया जाता है।

गौरतलब है कि एक जुलाई 2017 को जब जीएसटी लागू हुआ था। तब यह चार ‘स्लैब’ पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत वाली व्यवस्था थी। इसके अलावा, विलासिता की वस्तुओं एवं अहितकार वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता था।

जीएसटी सुधार के बाद 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब के अंतर्गत आने वाली करीब 99 प्रतिशत वस्तुओं को पांच प्रतिशत के स्लैब में स्थानांतरित कर दिया गया है। 28 प्रतिशत कर स्लैब के अंतर्गत आने वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं को 18 प्रतिशत के दायरे में लाया गया है।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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