भारत व जर्मनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने की समान चुनौती का सामना कर रहे हैं:राजदूत फिलिप एकरमैन

भारत व जर्मनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने की समान चुनौती का सामना कर रहे हैं:राजदूत फिलिप एकरमैन

भारत व जर्मनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने की समान चुनौती का सामना कर रहे हैं:राजदूत फिलिप एकरमैन
Modified Date: June 19, 2026 / 02:15 pm IST
Published Date: June 19, 2026 2:15 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि दोनों देश जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की समान चुनौती का सामना कर रहे हैं।

एकरमैन ने ‘ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा’ विषय पर बृहस्पतिवार को आयोजित जीएसडीपी वार्तालाप श्रृंखला के 10वें संस्करण में कहा, ‘‘ भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अब कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत हो गई है।’’

हरित एवं टिकाऊ विकास के लिए भारत-जर्मनी साझेदारी (जीएसडीपी) का यह कार्यक्रम नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सहयोग से आयोजित किया गया।

फिलिप एकरमैन ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल जलवायु आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक आवश्यकता भी है।

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा जलवायु कार्रवाई, आर्थिक अवसर और ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत संयोजन प्रस्तुत करती है।

जर्मनी के राजदूत ने कहा कि भारत और जर्मनी के अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे करने के अवसर पर इस साझेदारी के विशेष मायने हैं। दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी भंडारण, ग्रिड एकीकरण, ऊर्जा दक्षता, हरित शहरी परिवहन, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन शमन व अनुकूलन, सतत शहरी विकास और व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘ पश्चिम एशिया में हालिया संकट ने एक बार फिर ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में सौर, पवन, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और हरित हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।’’

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

जीएसडीपी साझेदारी को 2022 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य सतत और जलवायु-अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही यह पेरिस समझौते तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में योगदान देती है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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