भारत ने डेयरी, चावल, गेहूं, दाल, जीएम उत्पादों पर यूरोपीय संघ को नहीं दी शुल्क रियायत

भारत ने डेयरी, चावल, गेहूं, दाल, जीएम उत्पादों पर यूरोपीय संघ को नहीं दी शुल्क रियायत

भारत ने डेयरी, चावल, गेहूं, दाल, जीएम उत्पादों पर यूरोपीय संघ को नहीं दी शुल्क रियायत
Modified Date: January 28, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: January 28, 2026 10:27 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) भारत ने यूरोपीय संघ के साथ हुए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत डेयरी, चावल, गेहूं, दालें, चाय, आनुवंशिक रूप से संवर्धित (जीएम) उत्पाद और कॉफी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देते हुए कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने कहा कि बीफ एवं पोल्ट्री, मछली एवं समुद्री उत्पाद, पनीर, मक्का, फल एवं सब्जियां, मेवे, खाद्य तेल, मसाले और तंबाकू जैसे कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को भी संरक्षण दिया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, इन क्षेत्रों का सीधा संबंध छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से होने की वजह से यह संरक्षण देना महत्वपूर्ण है।

एक अधिकारी ने कहा कि भारत ने अब तक किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र को शुल्क रियायत नहीं दी है और भविष्य में भी इस क्षेत्र को संरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “हम इस क्षेत्र की हमेशा रक्षा करेंगे।”

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को एफटीए पर बातचीत पूरी की है और इसके इसी साल हस्ताक्षरित एवं लागू होने की संभावना है।

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि 27 यूरोपीय देशों के समूह ईयू ने भी इस समझौते के दायरे से कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखा है। उसने मांस और मांस उत्पाद, डेयरी उत्पाद, शहद, चावल, चीनी और तंबाकू जैसे उत्पादों को संरक्षण के तहत रखा है।

समझौते के तहत कई भारतीय कृषि उत्पादों को ईयू बाजार में शुल्क रियायतें मिलेंगी, जिससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत को चाय, कॉफी, मसाले और टेबल ग्रेप्स जैसे कृषि उत्पादों की करीब 87 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों में तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी।

इसके अलावा, ईयू कुछ समुद्री उत्पादों पर मौजूदा शून्य से 26 प्रतिशत तक के शुल्क दायरे में कटौती करेगा, जिससे समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होने की संभावना है।

मंत्रालय के अनुसार, ईयू का समुद्री उत्पाद आयात बाजार करीब 4.67 लाख करोड़ रुपये (53.6 अरब डॉलर) का है।

भाषा प्रेम

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