भारत में एआई नेतृत्वकर्ता बनने की पूरी क्षमता: सैम ऑल्टमैन
भारत में एआई नेतृत्वकर्ता बनने की पूरी क्षमता: सैम ऑल्टमैन
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) ओपनएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि भारत में पूर्ण रूप से एआई नेतृत्वकर्ता बनने की सभी आवश्यक क्षमताएं मौजूद हैं।
ऑल्टमैन ने देश की प्रौद्योगिकी प्रतिभा, राष्ट्रीय रणनीति और एआई की संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को इसकी बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए दैनिक अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में लिखा कि भारत घरेलू प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता और सरकार की नीतिगत पहल के जरिये एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने में आगे है।
ओपनएआई के सीईओ ने सरकार के भारत एआई मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह मिशन कंप्यूट क्षमता बढ़ाने, स्टार्टअप का समर्थन करने और स्वास्थ्य, कृषि तथा सार्वजनिक सेवाओं में बहुभाषी एआई अनुप्रयोगों को तेजी से लागू करने के लिए बनाया गया है, ताकि एआई करोड़ों लोगों के लिए एक आवश्यक माध्यम बन सके।
उन्होंने भारत में एआई टूल की तेजी से स्वीकार्यता को भी सराहा और कहा कि अब देश में साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ है, जो अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में भारत में सबसे ज्यादा विद्यार्थी चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं। साथ ही, ओपनएआई का मुफ्त शोध और सहयोग उपकरण ‘प्रिज्म’ इस्तेमाल करने में भारत चौथे नंबर पर है।
ऑल्टमैन ने कहा, ‘एआई के लाभ बढ़ाने के लिए पहुंच, उपयोग और क्षमता तीनों पर ध्यान देना जरूरी है। पहुंच का मतलब है कि लोग और संस्थान एआई का पूरी तरह लाभ उठा सकें। उपयोग का मतलब है कि एआई को स्कूलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक सेवाओं में प्रभावी रूप से लागू किया जाए और क्षमता का मतलब है कि लोगों को एआई का सही उपयोग करने की योग्यता और आत्मविश्वास दिया जाए, जिससे वे तेजी से सीख सकें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एआई तक पहुंच और उसका उपयोग असमान होगा, तो इसके लाभ भी असमान रहेंगे। अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो उत्पादकता और आर्थिक लाभ केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह सकते हैं।
ऑल्टमैन ने कहा, ‘ओपनएआई भारत में, भारत के साथ और भारत के लिए एआई विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने अपने उपकरण मुफ्त में उपलब्ध कराए हैं ताकि अधिक लोगों तक पहुंच बढ़ाई जा सके।’
उन्होंने तीन प्राथमिकताएं बताईं: एआई शिक्षा का विस्तार, कंप्यूटिंग और ऊर्जा अवसंरचना का निर्माण, और एआई को रोजमर्रा के कार्यों में शामिल करना।
उन्होंने कहा, “अवसंरचना ही भविष्य तय करती है।”
सुरक्षा पर जोर देते हुए ऑल्टमैन ने कहा, ‘एआई तभी सफल होगा जब लोग इस पर भरोसा करें। अगर एआई का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद नहीं होगा तो इसके लाभ सीमित रहेंगे।’
ऑल्टमैन ने कहा, ‘हम जल्द ही भारत सरकार के साथ नई साझेदारियों की घोषणा करेंगे, ताकि देश में अधिक लोगों तक एआई की पहुंच और इसके लाभ पहुंचाए जा सकें। एआई भारत के भविष्य को आकार देगा और भारत एआई के भविष्य को परिभाषित करेगा। और यह काम केवल एक लोकतंत्र ही कर सकता है।’
भाषा योगेश अजय
अजय

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