Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महाशिवरात्रि वाले दिन कैसी होनी चाहिए आपकी दिनचर्या? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया पूजा करने का सही तरीका, ध्यान से सुनिए महराज का दिव्य अनुभव

Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महाशिवरात्रि वाले दिन कैसी होनी चाहिए आपकी दिनचर्या? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया पूजा करने का सही तरीका, ध्यान से सुनिए महराज का दिव्य अनुभव

Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महाशिवरात्रि वाले दिन कैसी होनी चाहिए आपकी दिनचर्या? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया पूजा करने का सही तरीका, ध्यान से सुनिए महराज का दिव्य अनुभव

Premanand Ji Maharaj Mahashivratri/Image Source: Social media

Modified Date: February 15, 2026 / 02:10 pm IST
Published Date: February 15, 2026 1:08 pm IST
HIGHLIGHTS
  • महाशिवरात्रि की रात कैसे मनाते थे संत?
  • प्रेमानंद महराज ने बताई आठों पहर की पूजा
  • प्रेमानंद महराज का दिव्य अनुभव

Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रेमानंद महराज ने बताया कि इस दिन भक्तों की दिनचर्या और पूजा-अर्चना कैसी होनी चाहिए। महराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन उपवास और आठों पहर की पूजा का विशेष महत्व है।

आठों पहर की पूजा और रात्रि जागरण (Mahashivratri 2026)

महाशिवरात्रि पर चार पहर दिन के और चार पहर रात्रि के लिए भक्त पूरी तरह उपवास रखते थे। पूरे दिन भोजन नहीं करते और रातभर जागते रहते थे। इस दौरान भगवान शंकर की आराधना विशेष विधि से होती थी। प्रेमानंद महराज ने कहा कि आराधना में मंत्र जप, नाम स्मरण और चिंतन की विशेष महिमा है।

मंत्र और साधना का महत्व (remanand Maharaj Video)

Premanand Ji Maharaj Mahashivratri: महराज ने बताया कि रात्रि में “ साम्ब सदाशिव” मंत्र का जप किया जाता था। इसे बोलने के बजाय भीतर मन में जपना चाहिए और इसे गुरु से सीखना आवश्यक है। मंत्र का सही साधनापूर्वक जप करने से शिव की कृपा मिलती है।

भगवान भोलेनाथ की पूजा में प्रिय वस्तुएँ  (Sambh Sada Shiv Jaap)

महराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन पूजा में कुछ खास चीज़ों का प्रयोग किया जाता है, जैसे बेलपत्र, धतूरा का फल और कौड़े का फूल। साथ ही एक लोटा जल चढ़ाना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि ये चीज़ें भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं और इनसे ही पूजा पूर्ण मानी जाती है। प्रेमानंद महराज ने महाशिवरात्रि के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह दिन भक्तिभाव, उपवास और रातभर जागरण का प्रतीक है। भगवान शिव की आराधना में सही साधना, मंत्र और प्रेम से भरा हृदय ही सबसे बड़ा पुण्य है।

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लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।