भारत ने जलवायु कार्रवाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाकर जीडीपी का 5.6 प्रतिशत किया: सीतारमण

भारत ने जलवायु कार्रवाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाकर जीडीपी का 5.6 प्रतिशत किया: सीतारमण

भारत ने जलवायु कार्रवाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाकर जीडीपी का 5.6 प्रतिशत किया: सीतारमण
Modified Date: February 14, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: February 14, 2026 8:42 pm IST

नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत ने पिछले छह वर्षों में जलवायु कार्रवाई पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.6 प्रतिशत कर दिया है, जो कार्बन उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के राष्ट्रीय प्रयास को दर्शाता है।

सीतारमण ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में एक समिति की चर्चा में शिरकत करते हुए कहा कि भारत ने जलवायु कार्रवाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा, “छह साल पहले भारत अपने जीडीपी का लगभग 3.7 प्रतिशत जलवायु सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च करता था। आज यह खर्च बढ़कर करीब 5.6 प्रतिशत हो गया है। हमने इसके लिए आवश्यक धन पहले ही निवेश कर दिया है। हम किसी और देश या स्रोत से वित्त या प्रौद्योगिकी मिलने का इंतजार नहीं कर रहे हैं, लेकिन ये संसाधन उपलब्ध होना जरूरी हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करना जारी रखेगा और हम उस प्रतिबद्धता पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कार्बन नियंत्रण रणनीतियों को केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्तपोषित किया गया है ताकि उन्हें पूरे देश में लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताओं में से दो-तिहाई हासिल कर ली है और वह भी लक्ष्य तिथि से चार साल पहले।

सीतारमण ने कहा कि जो देश कम प्रदूषण फैला रहे हैं, उन्हें जलवायु कार्रवाई में कम योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “जितना ध्यान हम उत्सर्जन नियंत्रण पर देते हैं, उतना ही हमें जुझारूपन और अनुकूलन की ओर भी देखना होगा। ऐसा नहीं होने पर हमें बहुत कुछ खोना पड़ सकता है। प्रौद्योगिकियों का आपस में समन्वय करना होगा। कोई भी यह नहीं कह सकता कि उसने जलवायु से संबंधित चुनौतियों का पूरा समाधान तैयार कर लिया है।”

उन्होंने कहा, “यह सही नहीं होगा कि जो देश उत्सर्जन में कम योगदान करते हैं, उन्हें भी बराबरी का भार उठाना पड़े। जलवायु कार्रवाई की लागत वहन करने में अलग व्यवहार अपनाना आवश्यक होगा।”

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम


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