भारत को ऊर्जा के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता को लेकर सतर्क रहना होगाः ओएनजीसी चेयरमैन

भारत को ऊर्जा के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता को लेकर सतर्क रहना होगाः ओएनजीसी चेयरमैन

भारत को ऊर्जा के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता को लेकर सतर्क रहना होगाः ओएनजीसी चेयरमैन
Modified Date: April 10, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: April 10, 2026 4:10 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अरुण कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न ऊर्जा गतिरोध के बाद भारत को तेल एवं गैस की आपूर्ति के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का करीब आधा एवं गैस का 30 प्रतिशत और एलपीजी का 85-90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आयात करने वाले भारत को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति और कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ानी चाहिए।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा कि खाड़ी देशों से निर्यात के लिए उपयोग होने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग के छह सप्ताह तक बंद रहने से कई आयातक देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो गया और भारत को भी गैस आपूर्ति में प्राथमिकता तय करनी पड़ी।

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के प्रमुख ने कहा, “यह मानकर चलना कि पश्चिम एशिया हमारे नजदीक है और वहां से संसाधन आसानी से मिल जाएंगे, अब सही नहीं रह गया है।”

सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और बढ़ते तनाव ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थापित धारणाओं को कमजोर कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “परिस्थिति में अब बुनियादी बदलाव आया है। अगर दुनिया भूमंडलीकरण के रुझानों से अधिक उलट जाती है, तो फिर हमें और समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।”

सिंह घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताते हुए कहा कि देश में जहां भी तेल एवं गैस के संसाधन हैं, उनका उपयोग किया जाना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने भारत के लिए अपने ऊर्जा स्रोतों एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

रसोई गैस (एलपीजी) के संदर्भ में ओएनजीसी प्रमुख ने कहा कि भारत ने इसकी घरेलू आपूर्ति को पहले के 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक पहुंचाया है लेकिन इस काम में एक लागत भी आई है।

सिंह ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति के लिए पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को प्राथमिकता देने की वकालत करते हुए कहा कि इससे संकट की स्थिति में रसोई गैस आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।

वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रिफाइनिंग मार्जिन अब पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो गए हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत ने मौजूदा स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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