इंडिया रेटिंग्स ने दूसरी छमाही के लिए एनबीएफसी, एचएफसी के नकारात्मक परिदृश्य को कायम रखा

इंडिया रेटिंग्स ने दूसरी छमाही के लिए एनबीएफसी, एचएफसी के नकारात्मक परिदृश्य को कायम रखा

इंडिया रेटिंग्स ने दूसरी छमाही के लिए एनबीएफसी, एचएफसी के नकारात्मक परिदृश्य को कायम रखा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:34 pm IST
Published Date: September 24, 2020 11:55 am IST

मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने 2020-21 की दूसरी छमाही के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) के नकारात्मक परिदृश्य को कायम रखा है।

रेटिंग एजेंसी ने बृहस्पतिवार को कहा कि एनबीएफसी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों की वृद्धि स्थिर रहेगी। पहले उसने सालाना आधार पर इसमें 8-10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था। इसी तरह एचएफसी की संपत्तियों की वृद्धि दर निचले स्तर पर एक अंक में रहेगी।

इंडिया रेटिंग्स ने कहा, ‘‘कोविड-19 से संबंधित कारोबारी अड़चनों के मद्देनजर हमने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी, खुदरा एवं थोक) तथा आवास वित्त कंपनियों के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के परिदृश्य को नकारात्मक पर बरकरार रखा है।’’

इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि देशभर में कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण के प्रसार के मद्देनजर एनबीएफसी के परिचालन को सामान्य होने में लंबा समय लगेगा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि बेहतर रेटिंग वाली इकाइयों के लिए जुलाई के बाद तरलता और वित्तपोषण के वातावरण में सुधार हुआ है, लेकिन 2020-21 तथा आगे संपत्ति की गुणवत्ता के मुद्दे की वजह से कुल मुनाफा प्रभावित होगा।

एजेंसी ने कहा कि एनबीएफसी इस समय वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और उन्होंने ऋण प्रदान करने के नियमों को सख्त किया है। इससे पोर्टफोलियो की वृद्धि अभी पीछे चली गई है।

इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, एनबीएफसी के लिए प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्तियों में पुनर्गठित कर्ज का अनुपात एक अंक में ऊंचा रह सकता है। वाणिज्यिक वाहन ऋण, रीयल एस्टेट ऋण और लघु एवं मझोले उद्यमों को बड़ा कर्ज दबाव रहेगा। एजेंसी ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए संपत्ति वर्ग के रूप में वाणिज्यिक वाहन के परिदृश्य को नकारात्मक रखा है।

हालांकि, ट्रैक्टर ऋण पर परिदृश्य को दूसरी छमाही के लिए नकारात्मक से स्थिर कर दिया है।

भाषा अजय अजय महाबीर

महाबीर


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