भारत ने डब्ल्यूटीओ में सौर पैनल मामले में चीन के अनुरोध पर रोक लगाई

भारत ने डब्ल्यूटीओ में सौर पैनल मामले में चीन के अनुरोध पर रोक लगाई

भारत ने डब्ल्यूटीओ में सौर पैनल मामले में चीन के अनुरोध पर रोक लगाई
Modified Date: May 22, 2026 / 07:55 pm IST
Published Date: May 22, 2026 7:55 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) भारत ने सौर सेल, मॉड्यूल और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों के लिए अपने समर्थन उपायों को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में दायर मामले में पैनल गठित करने के चीन के अनुरोध पर रोक लगा दिया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

चीन ने इस महीने की शुरुआत में डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान निकाय (डीएसबी) से एक पैनल गठित करने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध दोनों देशों के बीच परामर्श के विफल रहने के बाद किया गया था। चीन ने पिछले वर्ष दिसंबर में यह मामला दायर किया था।

जिनेवा स्थित एक अधिकारी ने कहा कि भारत ने मामले में पैनल बनाने से संबंधित चीन के पहले अनुरोध को खारिज कर दिया है।

डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत, मामले से संबंधित देश पहली बार पैनल गठन के अनुरोध को रोक सकता है, लेकिन दूसरी बार भी यह अनुरोध किए जाने पर पैनल गठित हो जाता है।

यह मुद्दा 22 मई को जिनेवा में आयोजित डीएसबी की बैठक में उठा था। यदि चीन अगली बैठक में दोबारा अनुरोध करता है, तो पैनल का गठन स्वतः हो जाएगा।

चीन ने आरोप लगाया है कि भारत द्वारा कुछ प्रौद्योगिकी उत्पादों पर लगाए गए आयात शुल्क और घरेलू उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने वाले उपाय चीनी उत्पादों के साथ भेदभाव करते हैं। उसका दावा है कि भारत के ये कदम डब्ल्यूटीओ के विभिन्न समझौतों के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सभी कदम डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुरूप हैं।

इसके साथ ही भारत ने कहा कि वैश्विक सौर मॉड्यूल मूल्य शृंखला के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखने वाला चीन अन्य देशों में इस उद्योग के वैध विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है, जो कि विडंबनापूर्ण है।

यह पैनल गठन होने पर यह तय करेगा कि उच्च-प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों पर भारत द्वारा लगाए गए आयात शुल्क और सौर ऊर्जा उत्पादों के लिए प्रोत्साहन उपाय डब्ल्यूटीओ की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं या नहीं।

भारत ने सौर क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें आयातित सौर सेल एवं मॉड्यूल पर शुल्क, सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय उत्पादों के उपयोग की अनिवार्यता, ‘एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शामिल हैं।

दोनों देश डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं और यदि किसी सदस्य को लगता है कि दूसरे देश की नीतियों से उसके निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, तो वह विवाद निपटान व्यवस्था के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है।

चीन ने भारत के खिलाफ वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी एक अलग मामला दायर किया हुआ है।

वर्ष 2025-26 में चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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