भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि-डेयरी क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण: गोयल

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि-डेयरी क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण: गोयल

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि-डेयरी क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण: गोयल
Modified Date: February 3, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: February 3, 2026 8:51 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ भारत जिस द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे रहा है, उसमें संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गयी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद, गोयल ने कहा कि दोनों देश जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे जिसमें समझौते का विस्तृत विवरण होगा।

दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे जिसमें समझौते का विस्तृत विवरण होगा, जिसका उद्योग जगत और निर्यातकों को बेसब्री से इंतजार था।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि यह समझौता देश के लोगों के लिए काफी अवसर प्रदान करेगा और ‘‘हमारे संवेदनशील क्षेत्रों, कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह रक्षा करेगा।’’

गोयल ने कहा कि यह समझौता वस्त्र, प्लास्टिक, कपड़ा, गृह सज्जा, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, जैविक रसायन, रबड़ उत्पाद, मशीनरी और विमान जैसे भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए काफी अवसर खोलेगा।

इनमें से अधिकांश क्षेत्रों पर आयात शुल्क अमेरिकी बाजारों में मौजूदा 50 प्रतिशत से घटकर जल्द ही 18 प्रतिशत हो जाएगा।

मंत्री ने कहा कि भारत एक तेजी से विकसित होती और विशाल अर्थव्यवस्था है और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पाद, डेटा सेंटर उपकरण, उच्च गुणवत्ता वाली प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषी उत्पाद तथा कच्चे माल जैसी वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसे में, यह समझौता भारत को विश्व स्तरीय सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियां प्राप्त करने के अवसर भी प्रदान करता है, जिससे भारत की वृद्धि गाथा को और गति मिलेगी।’’

गोयल कहा कि भारत को अमेरिका के साथ एक ‘बहुत अच्छा’ व्यापार समझौता मिला है, जो अन्य प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर है।

वैश्विक बाजारों में भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा करने वाले प्रमुख देशों में चीन, वियतनाम (20 प्रतिशत), मलेशिया (19 प्रतिशत), बांग्लादेश (20 प्रतिशत), कंबोडिया और थाइलैंड (प्रत्येक 19 प्रतिशत) शामिल हैं।

अमेरिका के साथ हुए समझौते का विवरण दिये बिना गोयल ने कहा कि व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और समझौते की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए जल्द ही भारत-अमेरिका का एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटाने पर सहमति जताई है और जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘इसलिए भारत पर अंतिम शुल्क 18 प्रतिशत होगा।’’

शुल्क कम होने चमड़ा और जूते, समुद्री उत्पाद (झींगा सहित), रसायन, प्लास्टिक और रबड़, घरेलू साज-सज्जा और कालीन, मशीनरी, और चुनिंदा कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बड़ा लाभ मिलेगा।

एक सूत्र ने बताया, ‘‘इन वस्तुओं को अब अमेरिका में सर्वोत्तम दरें मिलेंगी।’’ उन्होंने कहा कि तिरुपुर (परिधान) और सूरत (रत्न और आभूषण) जैसे विभिन्न भारतीय संकुल उच्च शुल्क से प्रभावित थे। उन्हें शुल्क कम होने से लाभ मिलेगा।’’

इन क्षेत्रों से भारत का अमेरिका को निर्यात 30 अरब अमेरिकी डॉलर का था। अब इन पर शुल्क 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। देश का चार अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का निर्यात पहले से ही खनिज और प्राकृतिक संसाधन और कुछ कृषि उत्पादों जैसी छूट प्राप्त श्रेणियों में आते हैं।

इसके अलावा, 25 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की दवाइयां और मोबाइल फोन भी अमेरिकी शुल्क के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, अमेरिका इन वस्तुओं के लिए एक प्रमुख बाजार है, भारतीय निर्यातकों ने अन्य देशों में अपनी बिक्री में विविधता लाना शुरू कर दिया है।

भारत ने अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत दी गई छूट की तरह ही कुछ क्षेत्रों में शुल्क रियायतें देने पर सहमति जताई है।

समझौते के लागू होने के दिन से ही कुछ क्षेत्रों में आयात शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे, जबकि अन्य क्षेत्रों में इन्हें धीरे-धीरे कम किया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में शुल्क घटाए जाएंगे, जबकि अन्य क्षेत्रों में कोटा आधारित रियायतें दी जाएंगी।

भारत ने हमेशा से ही डेयरी, चावल, गेहूं, मांस, मुर्गी पालन, अनाज, आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ, सोया आटा और मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अपने व्यापार समझौतों के दायरे से बाहर रखा है।

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर कि भारत ने ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य वस्तुओं सहित 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है, सूत्रों ने बताया कि यह प्रक्रिया पांच वर्षों में पूरी होगी और इसमें विमान और उसके कलपुर्जों की खरीद भी शामिल होगी।

सूत्र ने बताया, ‘‘हम 50-55 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान आयात करेंगे। अकेले डेटा केंद्रों के लिए ही हमें सालाना 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सामान की आवश्यकता होगी।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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