वर्ष 2030 तक 700 अरब डॉलर का होगा भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र: रिपोर्ट
वर्ष 2030 तक 700 अरब डॉलर का होगा भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र: रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) भारत का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र वर्ष 2030 तक 700 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, लेकिन इसके लिए पैसा जुटाने की व्यवस्था अब भी बेहद बिखरी हुई और कमजोर है। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इलाज के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा आज भी लोगों को अपनी जेब से ही भरना पड़ता है।
‘प्रैक्सिस ग्लोबल अलायंस’ और ‘नैटहेल्थ’ की संयुक्त रिपोर्ट ‘इंडिया हेल्थ फाइनेंसिंग पोजिशन पेपर 2026’ यानी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसा जुटाने की मौजूदा स्थिति पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय स्वास्थ्य सेवा का मूल्य लगभग 300 अरब डॉलर था, जिसके 2030 तक 700 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर की बीमारियों का 20 प्रतिशत बोझ यानी हर पांचवां मरीज भारत में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च में भारत की हिस्सेदारी महज एक प्रतिशत है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2035 तक 200 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता है। निवेश किए गए हर 10 लाख डॉलर से 23-27 नए रोजगार पैदा होते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भारत में इलाज के कुल खर्च का 44 प्रतिशत हिस्सा ‘आउट-ऑफ-पॉकेट’ यानी अपनी जेब से दिया जाता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। लगभग 43 करोड़ भारतीय किसी भी प्रभावी बीमा कवर से बाहर हैं।
इसके मुताबिक, भारत में प्रति 1,000 लोगों पर केवल 0.9 चिकित्सक और 1.6 बिस्तर उपलब्ध हैं। 2035 तक देश को 10 लाख चिकित्सकों और 14.5 लाख अतिरिक्त बिस्तर की जरूरत होगी।
नैटहेल्थ की अध्यक्ष और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लि. की प्रवर्तक एवं कार्यकारी चेयरपर्सन अमीरा शाह ने कहा, ‘बिना स्वस्थ भारत के ‘विकसित भारत’ का सपना पूरा नहीं हो सकता’ और उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत बदलने के लिए निजी व सरकारी क्षेत्र की भागीदारी यानी मिलकर काम करने पर जोर दिया।
भाषा सुमित अजय
अजय

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