भारत के चावल निर्यातकों की नजर अब परंपरागत बाजारों से हटकर जॉर्डन, तुर्किये पर
भारत के चावल निर्यातकों की नजर अब परंपरागत बाजारों से हटकर जॉर्डन, तुर्किये पर
नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) भारतीय चावल निर्यातक पारंपरिक बाजारों से अलग तुर्किये और जॉर्डन जैसे नए और कम पारंपरिक बाजारों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दुनिया के सबसे बड़े आयातकों की तुलना में इन छोटे और तेजी से बढ़ते बाजारों से बेहतर लाभ मिल सकता है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब यह उद्योग अक्टूबर में होने वाले ‘भारतीय अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन’ (बीआईआरसी) 2026 की तैयारी कर रहा है।
भारत के चावल निर्यातक पारंपरिक बाजारों के अलावा तुर्किये और जॉर्डन को विकास के अगले बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं। अक्टूबर में होने वाले ‘भारतीय अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन’ (बीआईआरसी) 2026 की तैयारी के बीच, भारतीय चावल निर्यातक तुर्की और जॉर्डन जैसे नए बाजारों पर ध्यान दे रहे हैं।
सम्मेलन के आयोजकों के अनुसार, जॉर्डन को होने वाले भारतीय चावल के निर्यात में लगभग आठ गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि तुर्किये को बासमती चावल का निर्यात दोगुना हो गया है। इस बदलाव ने व्यापार जगत को चौंका दिया है, क्योंकि आमतौर पर इनमें से कोई भी देश दुनिया के शीर्ष चावल आयातकों में शामिल नहीं रहा है।
बाजार का यह रुख बीआईआरसी-2026 में ‘‘वर्ष 2027 में नजर रखने लायक शीर्ष 10 चावल बाजार: मांग के संकेत और प्रवेश की रणनीतियां‘ शीर्षक के सत्र का मुख्य विषय होगा। यह सत्र उद्योग की उस पुरानी सोच पर सवाल उठाएगा कि सबसे बड़े आयात बाजार ही अपने-आप सबसे अच्छे मौके होते हैं।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के उपाध्यक्ष, देव गर्ग ने कहा, ‘‘पारंपरिक तरीका यही रहा है कि सबसे बड़े आयात बाजारों को देखा जाए और मान लिया जाए कि वे ही सबसे अच्छे मौके हैं। हम इस सोच को चुनौती देना चाहते हैं।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘तुर्की और जॉर्डन इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। साल की शुरुआत में बहुत कम लोगों ने इन्हें खास बाजारों के तौर पर पहचाना होगा, फिर भी व्यापार के आंकड़ों में जबर्दस्त बदलाव आया।’’
ओईसीडी-एफएओ कृषि परिदृश्य 2026-2035 के अनुसार, अगले दशक में वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 2.2 करोड़ टन की बढ़ोतरी होने और वर्ष 2035 तक इसके लगभग 8.1 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। उम्मीद है कि 2035 तक वैश्विक चावल आयात में अफ़्रीका की हिस्सेदारी मौजूदा के लगभग 35 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 45 प्रतिशत हो जाएगी। इस अतिरिक्त व्यापार का मूल्य मौजूदा कीमतों के हिसाब से कई अरब डॉलर होगा।
आयोजकों का कहना है कि इससे निर्यातकों के सामने एक रणनीतिक सवाल खड़ा हो गया है, वैश्विक चावल की मांग में अगला 10 अरब डॉलर का व्यापार कहां से आएगा और कौन से आपूर्तिकर्ता सबसे पहले कदम उठाएंगे।
जॉर्डन और तुर्किये को होने वाले निर्यात खेप में बढ़ोतरी की एक वजह ईरान के साथ सीधे व्यापार में आई रुकावट है। इससे वहां भारतीय निर्यात में भारी कमी आई और निर्यात को दूसरे क्षेत्रीय रास्तों से भेजना पड़ा।
गर्ग ने कहा, ‘‘इस बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ईरान के व्यापार मार्ग में बदलाव के कारण हुआ है।’’
बीआईआरसी-2026 सत्र केवल आयात-मात्रा रैंकिंग से आगे बढ़कर संभावित बाजारों के लिए मांग में वृद्धि, आयात पर निर्भरता, प्रतिस्पर्धी मूल स्थानों, कीमत प्राप्ति, उत्पाद की उपयुक्तता, माल ढुलाई लागत, शुल्क, नियामक आवश्यकताओं और भुगतान जोखिम का आकलन करेगा।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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