सेंसेक्स 778 अंक लुढ़का, निफ्टी पांच महीने के निचले स्तर पर
सेंसेक्स 778 अंक लुढ़का, निफ्टी पांच महीने के निचले स्तर पर
मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 778 अंक टूटकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 279 अंक गिरकर पांच महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। मजबूती के साथ खुला सेंसेक्स कारोबार के दौरान एक समय 787.73 अंक फिसलकर 73,994.03 अंक के निचले स्तर तक आ गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 अंक पर बंद हुआ। यह छह अप्रैल, 2026 के बाद निफ्टी का सबसे निचला बंद स्तर है।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में करीब छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे।
दूसरी तरफ, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 3.98 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.64 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 2.31 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 2.18 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.27 प्रतिशत चढ़े।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.89 प्रतिशत बढ़कर 107.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ते वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण घरेलू बाजार में गिरावट जारी रही।’’
उन्होंने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की इस सप्ताह होने वाली बैठकों से पहले निवेशक सतर्क रहे और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत सख्ती की बढ़ती आशंकाओं के बीच लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की चिंता बनी रही।
नायर ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉण्ड प्रतिफल कई वर्षों के ऊंचे स्तर के करीब रहने से उभरते बाजारों की धारणा प्रभावित हुई और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने दबाव बढ़ाया।
हालांकि, कृत्रिम मेधा (एआई) के विकास की रफ्तार धीमी होने संबंधी टिप्पणियों से पारंपरिक आईटी सेवाओं पर तेजी से असर पड़ने की आशंका कुछ कम हुई, जिससे आईटी शेयरों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया।
व्यापक बाजार में मझोली कंपनियों के बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक ने 2.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जबकि छोटी कंपनियों का स्मालकैप सेलेक्ट 2.41 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
क्षेत्रवार सूचकांकों में पूंजीगत उत्पाद खंड ने सर्वाधिक 4.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जबकि रियल्टी खंड में 3.93 प्रतिशत, औद्योगिक खंड में 3.57 प्रतिशत, सेवा खंड में 3.03 प्रतिशत और बिजली खंड में 2.80 प्रतिशत की गिरावट रही।
हालांकि, आईटी खंड के शेयरों में 1.87 प्रतिशत और फोकस आईटी खंड में 1.49 प्रतिशत की तेजी रही।
बीएसई पर सूचीबद्ध कुल 3,292 शेयर गिरकर बंद हुए जबकि 1,190 शेयरों में तेजी रही और 202 अन्य अपरिवर्तित रहे।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल ऊंचा रहने और फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त का रुख पलट गया।’’
उन्होंने कहा कि बिकवाली व्यापक रही और सिर्फ आईटी क्षेत्र बढ़त के साथ बंद हुआ। बड़े प्रौद्योगिकी निर्यातकों में चुनिंदा खरीदारी से संकेत मिला कि एआई से जुड़े तत्काल व्यवधान की चिंताएं कुछ कम हुई हैं, लेकिन इससे बाजार के बाकी हिस्सों में आई कमजोरी की भरपाई नहीं हो सकी।
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुए।
यूरोपीय बाजार भी नुकसान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
घरेलू शेयर बाजार सोमवार को ‘गणेश चतुर्थी’ के अवसर पर बंद रहे थे।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 930.90 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी।
सेंसेक्स शुक्रवार को 120.83 अंक और निफ्टी 79.70 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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