एआई के संभावित दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण: एंथ्रोपिक के सीईओ

एआई के संभावित दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण: एंथ्रोपिक के सीईओ

एआई के संभावित दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण: एंथ्रोपिक के सीईओ
Modified Date: February 19, 2026 / 11:34 am IST
Published Date: February 19, 2026 11:34 am IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डारियो अमोदेई ने बृहस्पतिवार को कहा कि एआई मॉडल के स्वायत्त व्यवहार, लोगों तथा सरकारों के इसका दुरुपयोग करने की आशंका और आर्थिक विस्थापन की क्षमता से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ 2026 में अपने संबोधन में अमेरिका स्थित एआई अनुसंधान एवं सुरक्षा कंपनी के सीईओ अमोदेई ने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक मानक स्थापित किया है और ‘ग्लोबल साउथ’ के माध्यम से प्रौद्योगिकी एवं मानवीय लाभों के प्रसार में मदद की है।

अमोदेई ने 2023 में ‘ब्लेचली पार्क’ में शुरू हुए वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन के बाद से इस चौथे सम्मेलन पर कहा कि पिछले कुछ वर्ष में कृत्रिम मेधा में हुई प्रगति ‘‘ बेहद आश्चर्यजनक ’’ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति के साथ-साथ, एआई को व्यावसायिक रूप से अपनाने को लेकर इससे जुड़े सामाजिक एवं नैतिक प्रश्न भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

अमोदेई ने कहा कि एआई करीब एक दशक से तेजी से विकास कर रहा है। कुछ ही वर्ष में एआई मॉडल, अधिकतर कार्यों में मनुष्यों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को पार कर जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ अधिकतर मामलों में, हम उस स्थिति के तेजी से करीब पहुंच रहे हैं जिसे मैंने डेटा सेंटर में प्रतिभाओं का देश कहा है। एआई एजेंट का एक ऐसा समूह जो अधिकतर कार्यों में मनुष्यों से अधिक सक्षम है और अलौकिक गति से समन्वय कर सकता है। इस स्तर की क्षमता दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी है और यह मानवता के लिए अवसर एवं चिंता दोनों लाता है।’’

अवसरों की बात करते हुए अमोदेई ने कहा कि ऐसी प्रणालियां उन बीमारियों का इलाज करने में मदद कर सकती हैं जो हजारों वर्षों से लाइलाज रही हैं, मानव स्वास्थ्य में सुधार ला सकती हैं, ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) सहित अरबों लोगों को गरीबी से बाहर निकाल सकती हैं और ‘‘सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण’’ कर सकती हैं।

उन्होंने हालांकि एआई प्रणालियों के स्वायत्त व्यवहार, लोगों और सरकारों द्वारा उनके संभावित दुरुपयोग एवं आर्थिक विस्थापन की संभावना सहित गंभीर जोखिमों का भी उल्लेख किया।

अमोदेई ने कहा, ‘‘ जोखिमों की बात करें तो, मैं एआई मॉडल के स्वायत्त व्यवहार, लोगों और सरकारों द्वारा उनके दुरुपयोग की आशंका एवं आर्थिक विस्थापन की संभावना को लेकर चिंतित हूं। इन सवालों और चुनौतियों में भारत की भूमिका अवसरों एवं जोखिमों दोनों ही दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में