Middle East War Update: ‘प्रेसिडेंट बड़ी डील चाहते हैं..’, पाकिस्तान में होने वाली बैठक में ये मांग रखेगा अमेरिका, क्या इस बार होगा समझौता?
Middle East War Update: वाशिंगटन डीसी से एक बड़ा बयान सामने आया है, जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने ईरान को लेकर अमेरिका की नीति स्पष्ट की है।
jd vance on iran /image source: wikimedia
- ईरान पर अमेरिका का सख्त रुख
- परमाणु हथियार रोकना मुख्य लक्ष्य
- बड़ी डील चाहता है अमेरिका
Middle East War Update: वाशिंगटन डीसी: वाशिंगटन डीसी से एक बड़ा बयान सामने आया है, जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने ईरान को लेकर अमेरिका की नीति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्ट रुख है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। वैन्स के अनुसार, अमेरिका लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण रहे और क्षेत्रीय सुरक्षा बनी रहे। इस बयान को अमेरिका की कड़ी विदेश नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
एक बड़ी और व्यापक डील चाहते हैं ट्रंप
उपराष्ट्रपति वैन्स ने आगे बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल सीमित समझौते के बजाय एक बड़ी और व्यापक डील चाहते हैं। उनका उद्देश्य ऐसा समझौता करना है, जिससे न सिर्फ ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके, बल्कि वहां की जनता को भी आर्थिक तरक्की का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़े। हालांकि, हाल ही में पाकिस्तान में हुई बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई, लेकिन अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।
Iran America Meeting: पाकिस्तान में आयोजित होगी वार्ता
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सकती है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत के अगले चरण को लेकर तैयारियां जारी हैं और आने वाले दो दिनों के भीतर इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं बढ़ गई हैं।
ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता का अगला दौर पाकिस्तान में आयोजित किया जा सकता है। यह बैठक दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत के प्रयास हुए हैं, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण ठोस परिणाम सामने नहीं आ सके थे। अब नए सिरे से बातचीत की पहल को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ता है।
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