प्रगति, समावेशन के लिए नवोन्मेषण और शिक्षा महत्वपूर्ण माध्यम : सैमसंग अधिकारी

प्रगति, समावेशन के लिए नवोन्मेषण और शिक्षा महत्वपूर्ण माध्यम : सैमसंग अधिकारी

प्रगति, समावेशन के लिए नवोन्मेषण और शिक्षा महत्वपूर्ण माध्यम : सैमसंग अधिकारी
Modified Date: April 19, 2026 / 11:05 am IST
Published Date: April 19, 2026 11:05 am IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) दक्षिण कोरिया की उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग का मानना है कि भारत में नवोन्मेषण और शिक्षा प्रगति को सक्षम बनाने के साथ-साथ समावेशन के लिए उत्प्रेरक का काम करते हैं। कंपनी के दक्षिण-पश्चिम एशिया के कॉरपोरेट उपाध्यक्ष एस पी चुन ने यह बात कही है।

कंपनी ने वर्ष 2025-26 के लिए अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत प्रतिबद्धता को बढ़ाकर 193.89 करोड़ रुपये कर दिया है, जो 2024-25 में 144.48 करोड़ रुपये थी। सैमसंग इंडिया के ‘सिटीजनशिप’ कार्यक्रम से अब तक 15 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं।

चुन ने बयान में कहा, “भारत में तीन दशक पूरे होने के साथ हम नवोन्मेषण और शिक्षा को प्रगति और समावेशन के लिए उत्प्रेरक मानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में इस क्षमता को बड़े पैमाने पर सार्थक प्रभाव में बदलने पर ध्यान रहेगा।

उन्होंने कहा, “हम युवा नवोन्मेषकों की ऐसी पीढ़ी तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनमें कौशल, रचनात्मकता और सहयोग की भावना हो, ताकि वे जटिल सामाजिक चुनौतियों का समाधान कर सकें और अधिक समावेशी भविष्य में योगदान दे सकें।”

सैमसंग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में उसने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं के कौशल विकास को बढ़ावा दिया है। ये कार्यक्रम शिक्षा से लेकर रोजगार को सामूहिक रूप से लक्षित करते हैं।

कंपनी ने अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘सैमसंग इनोवेशन कैंपस’ (एसआईसी) के लिए 2025-26 में 77.25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), बिग डेटा, कोडिंग और प्रोग्रामिंग में प्रशिक्षण दिया जाता है।

वर्ष 2022 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत अब तक 6,500 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से 3,500 छात्रों को 2024 में ही प्रमाणन दिया गया है, जो इससे पिछले साल की तुलना में 17 प्रतिशत की वृद्धि है। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु और कर्नाटक में चल रहा है।

पिछले वर्ष कंपनी ने इस कार्यक्रम का विस्तार 10 राज्यों में 20,000 विद्यार्थियों तक किया है।

भाषा अजय अजय

अजय


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