अमेरिका में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर, संयुक्त बयान में पुनर्संतुलन का प्रावधान: गोयल
अमेरिका में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर, संयुक्त बयान में पुनर्संतुलन का प्रावधान: गोयल
नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत अमेरिका में हाल ही में आए वहां के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते में यह प्रावधान है कि परिस्थितियों के बदलने पर समझौते को संतुलित किया जा सकता है।
गोयल का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी व्यापारिक साझेदारों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत अस्थायी आयात शुल्क लगाए जाने के बाद आया है।
उच्चतम न्यायालय ने ट्रंप के अप्रैल 2025 के सभी आयातों पर जबावी शुल्क लगाने के फैसले को रद्द कर दिया है। इसके बाद 24 फरवरी से 10 प्रतिशत का यह अस्थायी शुल्क लागू हुआ।
साथ ही, ट्रंप ने 24 फरवरी को यह भी कहा कि वह इन शुल्कों को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर सकते हैं।
जब गोयल से पूछा गया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद क्या भारत की बातचीत की स्थिति बदल जाएगी, उन्होंने कहा, ‘‘हमें देखना होगा। वैसे आपने अमेरिका के साथ हमारा साझा बयान तो पढ़ा ही होगा। उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि अगर परिस्थितियां बदलती हैं, तो समझौते को दोबारा संतुलित किया जाएगा, ताकि दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहें।’’
संयुक्त घोषणा में कहा गया था कि अगर किसी भी देश द्वारा तय किए गए आयात शुल्क में बदलाव होता है, तो दूसरा देश अपने समझौते के नियमों में बदलाव कर सकता है।
इस बयान का हवाला देते हुए गोयल ने कहा, ‘इसका मतलब है कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए समान रूप से सुरक्षित और मान्य है।’
वाणिज्य मंत्री ने ‘न्यूज18 राइजिंग भारत समिट 2026’ में कहा कि सात फरवरी को दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तय कर ली थी।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत से आयात किए जाने वाले सामान पर लगाए गए जबावी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।
इसके अलावा, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को भी हटा दिया गया।
समझौते में दोनों देशों ने कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करने पर भी सहमति जताई। भारत ने अमेरिका के सभी औद्योगिक सामान और कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर से शुल्क हटाने या कम करने का निर्णय लिया है।
इस समझौते के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके कल-पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने की योजना बनाई है।
समझौते के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारी इस सप्ताह वाशिंगटन में मिलने वाले थे, लेकिन अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के जबावी शुल्क पर आए फैसले के बाद यह बैठक स्थगित कर दी गई।
गोयल ने कहा, ‘स्थिति लगातार बदल रही है। हमें देखना होगा। ट्रंप प्रशासन ने कुछ टिप्पणिया की हैं…। उनके पास नए शुल्क लगाने के कई और विकल्प भी हैं। उन्होंने पहले ही एक तरीका, यानी अनुच्छेद 122, इस्तेमाल करके 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। मेरा मानना है कि वह सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगले सप्ताह इसे बढ़ाकर पहले 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत किया जा सकता है।’
जब उनसे पूछा गया कि क्या शुल्क में बदलाव भारत के लिए कोई फायदा देता है, तो मंत्री ने कहा कि यह घरेलू कंपनियों को बिना रुकावट निर्यात जारी रखने का अवसर देता है।
उन्होंने कहा, ‘लेकिन ध्यान रखें, यह समझौता बेहतर था क्योंकि इसमें कई अन्य महत्वपूर्ण बातें शामिल थीं… इसलिए जब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जाता, मैं हर विवरण साझा करने की स्थिति में नहीं हूं। हालांकि, सभी संवेदनशील मुद्दों को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है। मैं यह जरूर कह सकता हूं कि इस समझौते में और भी कई सकारात्मक पहलू हैं। हमें इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि स्थिति आगे कैसे बढ़ती है।’
गोयल ने कहा कि दूध और डेयरी उत्पाद, सोयाबीन मील, मुर्गी पालन, जीन संबंधी खाद्य, चावल, गेहूं और मक्का जैसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा की गई है।
उन्होंने कहा, ‘ध्यान रखें, कोई भी व्यापार समझौता या अंतरराष्ट्रीय व्यापार तुलनात्मक लाभ पर आधारित होता है। इसका मतलब केवल यह नहीं कि शुल्क कितना है, बल्कि यह भी देखा जाता है कि इससे आप अपनी प्रतिस्पर्धा में कितनी बढ़त पा सकते हैं। और निश्चित रूप से, जब शुल्क 50 प्रतिशत था, हमारी कंपनियों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।’
भाषा योगेश रमण
रमण

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