शह मात The Big Debate: निशाने पर ST-SC.. NCRB रिपोर्ट या रेड अलर्ट? MP में क्राइम के डराते आंकड़े, आखिर अपराधों में क्यों नहीं लग पा रही लगाम?

निशाने पर ST-SC.. NCRB रिपोर्ट या रेड अलर्ट? MP में क्राइम के डराते आंकड़े, Madhya Pradesh Crime Rate NCRB Report

शह मात The Big Debate: निशाने पर ST-SC.. NCRB रिपोर्ट या रेड अलर्ट? MP में क्राइम के डराते आंकड़े, आखिर अपराधों में क्यों नहीं लग पा रही लगाम?
Modified Date: May 8, 2026 / 12:33 am IST
Published Date: May 8, 2026 12:33 am IST

जबलपुर/भोपालः Madhya Pradesh Crime Rate तमाम दावों के बाद भी मध्यप्रदेश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। ये हम नहीं बल्कि NCRB की रिपोर्ट कह रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में मध्यप्रदेश की छवि फिर धूमिल हुई है। यहां आदिवासियों के साथ देश में सबसे ज्यादा प्रताड़ना होती है, जबकि दलित अपराध में दूसरे पायदान पर है। वहीं बुजुर्ग भी यहां सुरक्षित नहीं है।

Madhya Pradesh Crime Rate मध्यप्रदेश में NCRB की रिपोर्ट के लेकर नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। दरअसल, नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट जारी की है जिसमें साल 2024 में देश भर में दर्ज हुए अपराधों का ब्यौरा है, लेकिन चिंता की बात ये है कि- मध्यप्रदेश- बुजुर्गों पर अत्याचार के 5,875 केस के साथ देश में नंबर 1 पर है। साथ ही अनुसूचित जनजाति ST पर अपराधों के मामले में भी 3,165 केस के साथ एमपी नंबर वन पर है। वहीं अनुसूचित जाति SC पर अपराध के मामले में एमपी 7,765 केस के साथ देश में दूसरे नंबर पर है। इस आंकड़े के सामने आते ही सूबे में कांग्रेस-बीजेपी के सियासी शमशीरें खिंच गई हैं। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि BJP सरकार में आदिवासियों पर सालों से अत्याचार हो रहा है और NCRB की रिपोर्ट के बाद एमपी के थानों में अब आदिवासियों की कम रिपोर्ट लिखी जाएगी।

कांग्रेस जहां NCRB की रिपोर्ट के बहाने सरकार की घेराबंदी कर रही है तो बीजेपी नेताओं की सफाई भी सामने आई। बीजेपी ने कहा कि एससी-एसटी समेत हर वर्ग के लोग अब जागरुक होकर अपनी रिपोर्ट लिखा रहे हैं जिससे अपराधों का रजिस्ट्रेशन बढ़ा है। ऐसे में अपराध के रजिस्ट्रेशन और अपराधों के होने को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। कुलमिलाकर ये पहला मौका नहीं है जब ST-SC और NCRB की रिपोर्ट को लेकर सूबे की सियासत गर्माई हो। पक्ष-विपक्ष के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन सवाल ये कि अपराध के मामले में मध्यप्रदेश इतना आगे कैसे बढ़ गया? सवाल ये कि- ST-SC के लिए सरकार की संवेदनशीलता और कई योजनाओं के बावजूद अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही? सवाल ये कि-क्या अब एमपी में बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं है? तो ऐसे में एमपी कैसे सेफ बनेगा?

 


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।