महाराष्ट्र सरकार ने पेश की 97,706 करोड़ की अनुपूरक मांगें, खजाने पर 74,817 करोड़ रुपये का बोझ

महाराष्ट्र सरकार ने पेश की 97,706 करोड़ की अनुपूरक मांगें, खजाने पर 74,817 करोड़ रुपये का बोझ

महाराष्ट्र सरकार ने पेश की 97,706 करोड़ की अनुपूरक मांगें, खजाने पर 74,817 करोड़ रुपये का बोझ
Modified Date: June 22, 2026 / 01:38 pm IST
Published Date: June 22, 2026 1:38 pm IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, 22 जून (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने 97,706.40 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगें विधानसभा में सोमवार को पेश कीं। इसमें कृषि ऋण माफी योजना के लिए 20,552 करोड़ रुपये शामिल हैं। इससे राज्य के खजाने पर 74,817.66 करोड़ रुपये का शुद्ध अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

गौरतलब है कि विपक्ष लंबे समय से न्यूनतम तकनीकी शर्तों के साथ पूर्ण कृषि ऋण माफी की मांग कर रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने इस महीने की शुरुआत में ‘‘कड़ी’’ शर्तों को हटाने और किसानों के लिए व्यापक ऋण माफी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ये मांगें पेश कीं।

कुल अनुपूरक मांगों में से 13,825.71 करोड़ रुपये अपरिहार्य व्यय के लिए, 66,559.40 करोड़ रुपये कार्यक्रम संबंधी खर्च के लिए और 17,321.29 करोड़ रुपये केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत उपलब्ध निधियों से समर्थित व्यय के लिए मांगे गए हैं।

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 97,706.40 करोड़ रुपये की सकल मांगों के बावजूद समायोजन और वसूली के कारण वास्तविक वित्तीय बोझ 74,817.66 करोड़ रुपये होगा।

सबसे बड़े आवंटनों में 2026 की ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना’ के लिए 20,552 करोड़ रुपये शामिल हैं।

केंद्र की ‘राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता’ योजना के तहत ब्याज-मुक्त ऋणों के लिए 10,007.10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के ऋण और ब्याज देनदारियों के भुगतान के लिए 8,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

सरकार ने ‘विकसित भारत–रोजगार व आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कार्यक्रम के लिए 7,367.32 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। इसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है।

सरकारी कार्यालयों के बिजली बिल के भुगतान के लिए एकीकृत बिलिंग प्रणाली के तहत 4,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

एएमआरयूटी 2.0 मिशन (शहरों को जल-सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से) के लिए 3,076 करोड़ रुपये मांगे गए हैं, जबकि सिंहस्थ कुंभ मेले की योजना और क्रियान्वयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

सरकार ने कृषि पंपों, पावरलूम (विद्युत करघा), वस्त्र एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर सब्सिडी हेतु 2,722.42 करोड़ रुपये और ट्यूशन व परीक्षा शुल्क को कवर करने वाली छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 2,360.06 करोड़ रुपये की मांग की है।

श्रवणबाल सेवा राज्य पेंशन योजना के लाभार्थियों के लिए 2,000 करोड़ रुपये और संजय गांधी निराधार योजना के तहत दिव्यांग एवं सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए 1,874.38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय एवं वेतन के लिए 1,734.92 करोड़ रुपये तथा विदर्भ सिंचाई विकास निगम की परियोजनाओं के लिए 1,100 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

अन्य प्रमुख प्रावधानों में स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान (शहरी) 2.0 के लिए 1,000 करोड़ रुपये और रेवास-रेड्डी तटीय राजमार्ग परियोजना के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को इक्विटी योगदान के रूप में 1,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

अनुपूरक मांगों में रोजगार गारंटी योजनाओं के लिए 942.50 करोड़ रुपये, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में इक्विटी योगदान के रूप में 777 करोड़ रुपये, महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना के लिए 744.45 करोड़ रुपये और पंढरपुर स्थित श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर परिसर के आसपास विकास एवं वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स योजना के लिए 600 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

विभागवार देखें तो सहकारिता, विपणन एवं वस्त्र विभाग के लिए 22,015.42 करोड़ रुपये का सबसे अधिक अनुपूरक आवंटन प्रस्तावित है। इसके बाद शहरी विकास विभाग को 15,152.43 करोड़ रुपये और उद्योग, ऊर्जा, श्रम एवं खनन विभाग को 14,760.48 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

वित्त विभाग को 9,934 करोड़ रुपये और योजना विभाग को 9,539.03 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

सरकार के अनुसार, लोक निर्माण विभाग को 5,361.90 करोड़ रुपये, जबकि सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग तथा लोक स्वास्थ्य विभाग को क्रमशः 3,481.01 करोड़ रुपये और 3,061.26 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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