फ्लैट को किराये पर देने भर से खरीदार ‘उपभोक्ता’ श्रेणी से नहीं हो जाता बाहरः उच्चतम न्यायालय
फ्लैट को किराये पर देने भर से खरीदार 'उपभोक्ता' श्रेणी से नहीं हो जाता बाहरः उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी रिहायशी फ्लैट को किराये पर या पट्टे पर देने भर से उसका खरीदार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी से बाहर नहीं हो जाता है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी खरीदार को ‘वाणिज्यिक उद्देश्य’ के आधार पर उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर करने के लिए बिल्डर को यह साबित करना होगा कि फ्लैट खरीदने का प्रमुख उद्देश्य व्यावसायिक था।
पीठ ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा दो(1)(डी) के तहत ‘उपभोक्ता’ वह व्यक्ति है जो किसी वस्तु को मूल्य देकर खरीदता है या सेवाएं प्राप्त करता है। हालांकि, पुनर्विक्रय या किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए सामान खरीदने वाला व्यक्ति इसकी परिभाषा से बाहर है।
शीर्ष अदालत ने कहा, “फ्लैट को पट्टे पर देने भर से यह नहीं पता चलता है कि अपीलकर्ता ने संपत्ति को प्रमुख रूप से वाणिज्यिक गतिविधि में संलग्न होने के उद्देश्य से खरीदा था।”
पीठ ने यह भी कहा कि ‘व्यावसायिक उद्देश्य’ हरेक मामले की परिस्थितियों के आधार पर तथ्यात्मक रूप से तय किया जाना चाहिए।
यह आदेश विनीत बहरी की अपील पर पारित किया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें फ्लैट किराये पर दिए जाने को व्यावसायिक उद्देश्य मानते हुए उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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