पश्चिम एशिया संघर्ष से आर्थिक परिदृश्य पर पड़ सकता नकारात्मक असर, वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान

पश्चिम एशिया संघर्ष से आर्थिक परिदृश्य पर पड़ सकता नकारात्मक असर, वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान

पश्चिम एशिया संघर्ष से आर्थिक परिदृश्य पर पड़ सकता नकारात्मक असर, वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान
Modified Date: March 11, 2026 / 07:32 pm IST
Published Date: March 11, 2026 7:32 pm IST

मुंबई, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में संघर्ष, यदि लंबा चलता है तो कच्चे तेल और जिंस की कीमतों पर इसके प्रभाव के कारण भारत के आर्थिक परिदृश्य पर इसका नकारात्मक असर होगा। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत तक रह सकती है, जो अनिश्चितताओं के बाद भी बेहतर है।

इस वृद्धि को मजबूत निजी उपभोग और निजी निवेश में कुछ तेजी से समर्थन मिलेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, उभरते क्षेत्रों द्वारा संचालित निजी पूंजीगत व्यय में सुधार के साथ निजी निवेश धारणा सुधर रही है।

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि निर्यात वृद्धि में तेजी बनी रहेगी, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में कम अमेरिकी शुल्क, स्थिर वैश्विक वृद्धि और मजबूत सेवा निर्यात से समर्थन मिलेगा।

खुदरा मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर औसतन 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 2.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान रखा गया है। इस साल मानसून सामान्य रहने के अनुमान के साथ महंगाई मौजूदा निचले स्तर से सामान्य स्तर पर रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 2024 श्रृंखला में खाद्य पदार्थों का भारांश कम होने से खाद्य मुद्रास्फीति के सामान्य होने से मुख्य मुद्रास्फीति में होने वाली वृद्धि सीमित रहेगी।’’

क्रिसिल का कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर के करीब रहने का अनुमान है। इससे केंद्रीय बैंक को रेपो दर को स्थिर रखने और वर्ष 2025 में 1.25 प्रतिशत की कटौती के प्रभाव को बनाए रखने पर ध्यान देने में मदद मिलेगी।

आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत दरें स्थिर रहेंगी। वर्ष 2025 में की गई 1.25 प्रतिशत की कुल कटौती का प्रभाव बैंक ऋण और जमा दरों पर भी जारी रहेगा।

क्रिसिल ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आरबीआई नकदी प्रबंधन पर सक्रिय रहेगा। हम उम्मीद करते हैं कि अनुकूल मौद्रिक नीति और वृहद आर्थिक बुनियाद के साथ वित्त वर्ष 2026-27 में वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी।’’

भाषा रमण अजय

अजय


लेखक के बारे में