वित्त मंत्रालय,एनएफआरए ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक पर संसदीय समिति के समक्ष रखा अपना रुख

वित्त मंत्रालय,एनएफआरए ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक पर संसदीय समिति के समक्ष रखा अपना रुख

वित्त मंत्रालय,एनएफआरए ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक पर संसदीय समिति के समक्ष रखा अपना रुख
Modified Date: June 24, 2026 / 06:04 pm IST
Published Date: June 24, 2026 6:04 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) ने कॉरपोरेट कानूनों में संशोधन से जुड़े एक विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के समक्ष बुधवार को अपना रुख स्पष्ट किया।

कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम में संशोधन करना है, ताकि कारोबार करने में आसानी हो, छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सके और देश के कॉरपोरेट कामकाज के ढांचे को आधुनिक बनाया जा सके।

इस विधेयक पर भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं सांसद सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति गौर कर रही है। समिति प्रस्तावित बदलावों पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव भी ले रही है।

एनएफआरए के चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने समिति को विधेयक के विभिन्न पहलुओं से बुधवार को अवगत कराया। इस दौरान नियामक की पूर्णकालिक सदस्य स्मिता झिंगरन और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

एनएफआरए, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भी समिति को विधेयक पर जानकारी दी।

बैठक में समिति के सदस्य पी. पी. चौधरी, सुप्रिया सुले, निशिकांत दुबे और विवेक तन्खा शामिल रहे।

इस महीने की शुरुआत में समिति ने विधेयक पर विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए थे।

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 मार्च को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था, जिसे बाद में समिति को भेज दिया गया।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत दंड व्यवस्था को तार्किक बनाने, छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को आपराधिक दायित्व से हटाकर मौद्रिक दंड में बदलने और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रावधान है, जिससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिल सके।

इन सुधारों का उद्देश्य कॉरपोरेट अनुपालन ढांचे को बेहतर बनाना, मुकदमेबाजी को कम करना और कंपनियों तथा एलएलपी के लिए अधिक सुगम नियामक माहौल तैयार करना भी है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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