आयातकों की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली से अधिकांश तेल-तिलहन के दाम टूटे

आयातकों की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली से अधिकांश तेल-तिलहन के दाम टूटे

आयातकों की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली से अधिकांश तेल-तिलहन के दाम टूटे
Modified Date: June 24, 2026 / 10:08 pm IST
Published Date: June 24, 2026 10:08 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) आयातकों द्वारा आयात की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली करने के कारण बाजार की कारोबारी धारणा प्रभावित होने की वजह से बुधवार को सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल जैसे अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट रही। सूरजमुखी तेल से सस्ता होने तथा बिनौला तेल की कम उपलब्धता के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में सुधार रहा। कम उपलब्धता के बीच मांग होने की वजह से बिनौलातेल के दाम स्थिर रहे।

मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि आयातक अब भी लागत से लगभग तीन प्रतिशत नीचे दाम पर सोयाबीन एवं पामोलीन तेल बेच रहे हैं। इस कम दाम पर बिकवाली के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन तथा पाम-पामोलीन तेल के दाम में गिरावट रही। ऊंचे भाव पर लिवाली कमजोर रहने के कारण सरसों तेल-तिलहन में भी गिरावट है।

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कच्चे तेल के साथ-साथ खाद्य तेलों के आयात के लिए खर्च होने वाले विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपनी मंशा को जाहिर करती है, वहीं लंबे समय से आयातकों द्वारा पैसों की तंगी से निपटने और बैंकों में अपना ऋण साखपत्र चलाते रहने के लिए लागत से नीचे दाम पर बिकवाली जारी रखने पर रोक लगाने की कोई कोशिश भी नजर नहीं आती। इस ओर सरकार को सचेत होने की जरूरत है। इस लागत से नीचे दाम पर बिकवाली से आम बाजार धारणा भी प्रभावित होती है।

मांग होने तथा उपलब्धता लगभग नगण्य होने की स्थितियों के बीच बिनौला तेल के दाम स्थिर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि मूंगफली का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे है। सूरजमुखी तेल के मुकाबले मूंगफली सस्ता है। सस्ता होने से मूंगफली तेल की मांग है और यह बिनौला तेल की कमी को भी पूरा कर रहा है। इस ओर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिये। एक वक्त देश में सूरजमुखी का लगभग पर्याप्त उत्पादन होता था लेकिन संभवत: सूरजमुखी को भी मौजूदा समय के मूंगफली की स्थिति का ही सामना करना पड़ा हो जिसका नतीजा यह है कि आज देश में सूरजमुखी की खेती विलुप्त हो गयी और इस मामले में देश लगभग आयात पर निर्भर हो गया।

सरकार को मूंगफली की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कोई उचित कदम उठाना चाहिये।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,575-7,600 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,625-7,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,465-2,765 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,575 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,575-2,675 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,575-2,720 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,150 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 7,050-7,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 6,900-6,975 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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