बहुविकल्पीय प्रश्न प्रारूप से बुद्धिमत्ता का बेहतर आकलन संभव: नीति आयोग सदस्य

बहुविकल्पीय प्रश्न प्रारूप से बुद्धिमत्ता का बेहतर आकलन संभव: नीति आयोग सदस्य

बहुविकल्पीय प्रश्न प्रारूप से बुद्धिमत्ता का बेहतर आकलन संभव: नीति आयोग सदस्य
Modified Date: July 5, 2026 / 02:32 pm IST
Published Date: July 5, 2026 2:32 pm IST

(बिजय कुमार सिंह)

नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) नीति आयोग के सदस्य गोवर्धन दास ने रविवार को जेएनयू समेत विश्वविद्यालयों में भी प्रवेश परीक्षाओं के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू) प्रारूप का समर्थन किया और कहा कि यह छात्रों की बौद्धिक क्षमता का निष्पक्ष आकलन करता है।

दास की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) की आलोचना हो रही है।

कई शिक्षक संगठनों का कहना है कि एमसीक्यू आधारित परीक्षा के कारण विश्लेषणात्मक और वर्णनात्मक कौशल पर जोर कम हो गया है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘प्रवेश परीक्षाओं के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न प्रारूप जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों के लिए अनुपयुक्त नहीं है, क्योंकि विश्वविद्यालयों को रटने की क्षमता नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता की जांच करनी होती है… यदि आप दो-तीन चीजों को जोड़कर नहीं समझ सकते, तो आप प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकते।’

दास ने कहा, ‘एमसीक्यू प्रारूप हमेशा प्राथमिकता में रहता है, क्योंकि कम समय में उम्मीदवारों के कई पहलुओं का आकलन किया जा सकता है।’

उन्होंने सीयूईटी को एक नवोन्मेषी विचार भी बताया।

पिछले महीने एक संसदीय समिति ने सीयूईटी को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि इसका बहुविकल्पीय प्रारूप मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप परीक्षा के ढांचे और प्रश्नों की गुणवत्ता की समीक्षा की सिफारिश भी की थी।

इस पर दास ने कहा, ‘कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े छात्रों का भाषा कौशल सरकारी स्कूलों से आने वाले उन छात्रों की तुलना में बेहतर होगा जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं… जेएनयू (जवाहर लाल नेहरू) जैसे विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए हम वास्तव में यह नहीं देख रहे हैं कि आप कितनी आकर्षक अंग्रेजी बोल या लिख सकते हैं, बल्कि हम बुद्धिमान छात्रों की तलाश कर रहे हैं।’

भाषा योगेश रमण

रमण


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