बिहार के विकास के लिए नाबार्ड का मास्टरप्लान, 2.80 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का आकलन
बिहार के विकास के लिए नाबार्ड का मास्टरप्लान, 2.80 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का आकलन
पटना, 30 मार्च (भाषा) बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देने और ग्रामीण क्षेत्रों में आय व रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ‘स्टेट फोकस पेपर’ जारी किया है। रिपोर्ट में राज्य के प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के लिए कुल 2.80 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता (क्रेडिट पोटेंशियल) का आकलन किया गया है।
बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था से संबंधित स्टेट फोकस पेपर का लोकार्पण वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और सहकारिता मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने मिलकर किया।
मंत्रियों ने बैंकों को बिहार के कम साख जमा (सीडी) अनुपात को लेकर घेरा। पूछा कि राज्य का सीडी अनुपात 57.36 प्रतिशत देश में सबसे कम क्यों है? आखिर बिहार की जनता का जमा पैसा लोगों को ऋण में क्यों नहीं दिया जाता है। यह पैसा कहां भेज दिया जाता है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किसानों को कर्ज देने में बैंकों को उदारता बरतने की हिदायत दी।
नाबार्ड के अनुसार, इस क्रेडिट योजना का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को दिया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, महिला उद्यमियों तथा ग्रामीण युवाओं को संस्थागत बैंकिंग से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। रिपोर्ट के आधार पर बैंक अब जिलावार ऋण वितरण लक्ष्य तय करेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, कृषि क्षेत्र के लिए कुल 1,24,558.45 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। इसमें फसल ऋण के लिए 69,336.19 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध हो सके। पशुपालन और डेयरी गतिविधियों के विस्तार के लिए लगभग 18,000 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है, जबकि मछली पालन के विकास के लिए 2,972.89 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित करने और पलायन को कम करने के उद्देश्य से एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,24,147.60 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में छोटे उद्योग, स्टार्टअप और पारंपरिक कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नाबार्ड ने शिक्षा ऋण के लिए 4,586.56 करोड़ रुपये, आवास क्षेत्र के लिए 11,132.55 करोड़ रुपये तथा सामाजिक बुनियादी ढांचे—जैसे स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और स्वच्छता परियोजनाओं—के लिए 6,087.53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, विशेषकर सौर ऊर्जा और बायोगैस के विस्तार के लिए 1,589.25 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है।
किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और फसल नुकसान कम करने के लिए शीत भंडारगृह तथा गोदाम निर्माण को 7,951.16 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 6,218.03 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है, जिससे कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला मजबूत हो सके।
भाषा कैलाश जितेंद्र अजय
अजय

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