एक लाख करोड़ रुपये की संपत्ति वाली एनबीएफसी ‘उच्च स्तर’ की श्रेणी में

एक लाख करोड़ रुपये की संपत्ति वाली एनबीएफसी ‘उच्च स्तर’ की श्रेणी में

एक लाख करोड़ रुपये की संपत्ति वाली एनबीएफसी ‘उच्च स्तर’ की श्रेणी में
Modified Date: June 24, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: June 24, 2026 9:20 pm IST

मुंबई, 24 जून (भाषा) एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को ‘उच्च स्तर’ श्रेणी में रखा जाएगा। इसके लिए ऐसी कंपनियों की पहचान करने के मौजूदा तरीके की जगह एक आसान और ठोस मानदंड अपनाया जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि ‘उच्च स्तर’ में आने वाली एनबीएफसी के लिए व्यापक नियमों की जरूरत है।

‘उच्च स्तर’ में एनबीएफसी की पहचान करने के तरीके और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को विभिन्न ‘स्तरों’ में रखने से जुड़े निर्देशों की समीक्षा के आधार पर मौजूदा नियमों में बदलाव करने की जरूरत है।

केंद्रीय बैंक एनबीएफसी को उनके आकार, जोखिम स्थिति और प्रणाली के लिए उनकी अहमियत के आधार पर नियमन करता है।

पैमाना आधारित नियमन के तहत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को एनबीएफसी-बुनियादी स्तर, एनबीएफसी-मध्यम स्तर, एनबीएफसी-उच्च स्तर और एनबीएफसी-शीर्ष स्तर में बांटा गया है।

रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – पंजीकरण, छूट और पैमाना आधारित नियमन के लिए रूपरेखा) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026 के अनुसार, ‘उच्च स्तर’ में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनकी पहचान रिजर्व बैंक हर साल खास तौर पर करता है और जिनके लिए अधिक नियमों की जरूरत होती है।

‘उच्च स्तर’ में एनबीएफसी की पहचान मानदंडों के बारे में कहा गया, ‘‘उच्च स्तर में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनका संपत्ति आकार वित्त वर्ष के ताजा वित्तीय विवरण के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।’’

इसमें आगे कहा गया है कि एनबीएफसी-उच्च स्तर (यूएल) की पहचान के मानदंड की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही, एनबीएफसी-उच्च स्तर की पहचान के लिए संपत्ति आकार की सीमा की समीक्षा हर तीन साल में की जानी चाहिए।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि जो एनबीएफसी किसी वाणिज्यिक बैंक की समूह इकाई हैं और अगर कोई खास व्यापार/गतिविधि एनबीएफसी और उसके मूल बैंक दोनों कर रहे हैं, उन्हें लागू नियमों का पालन करना चाहिए।

आरबीआई के अनुसार, ‘‘ये नियम उन एनबीएफसी पर लागू होते हैं जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की समूह इकाई हैं, चाहे इन निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार उनका ‘स्तर’ के आधार पर वर्गीकरण कुछ भी हो।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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