एनसीएलएटी ने कहा, आईबीसी ‘कर्ज वसूली’ का तंत्र नहीं, यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ याचिका खारिज की

एनसीएलएटी ने कहा, आईबीसी ‘कर्ज वसूली’ का तंत्र नहीं, यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ याचिका खारिज की

एनसीएलएटी ने कहा, आईबीसी ‘कर्ज वसूली’ का तंत्र नहीं, यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ याचिका खारिज की
Modified Date: September 17, 2023 / 11:04 am IST
Published Date: September 17, 2023 11:04 am IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) ‘वसूली’ का तंत्र नहीं है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने यूनाइटेड टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ उसके एक परिचालन ऋणदाता द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह निष्कर्ष दिया है।

दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस महीने में दूसरी बार ऐसा निष्कर्ष दिया है।

इससे पहले इसने विप्रो लिमिटेड के खिलाफ एक दिवाला याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। एनसीएलएटी ने उस समय कहा था कि दिवाला कानून का इस्तेमाल दिवालिया कंपनियों से कर्ज की वसूली के लिए नहीं किया जा सकता।

पिछले सप्ताह यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ एक याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एम वेणुगोपाल और न्यायमूर्ति श्रीशा मेरला की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘‘बार-बार शीर्ष अदालत ने अपने निर्णयों में कहा कि आईबीसी एक ‘वसूली तंत्र’ नहीं है।’’

इसके साथ ही अपीलीय न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की बेंगलुरु पीठ के एक आदेश को बरकरार रखा है। एनसीएलटी की बेंगलुरु पीठ ने अपने आदेश में यूनाइटेड टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ एक परिचालन ऋणदाता की याचिका को खारिज कर दिया था। यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ यह याचिका 8.46 करोड़ रुपये की कर्ज चूक के लिए दायर की गई थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने कंपनी के अनुरोध पर उसके साथ एक ‘निपटान’ के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत कुछ राशि का भुगतान किया गया था, जबकि बड़ी राशि बकाया है। उसके वकील ने दलील दी कि संबंधित पक्षों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में यूनाइटेड टेलीकॉम को ‘निपटान समझौते’ की शर्तों को पूरा करना चाहिए। ।

हालांकि, यूनाइटेड टेलीकॉम ने स्पष्ट रूप से किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि ‘मांग नोटिस’ जारी होने से पहले ही यह विवाद चल रहा था।

भाषा अजय अजय

अजय


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