एनसीएलटी का एंटरटेनमेंट सिटी में अल्पांश हिस्सेदारी परमेश कंस्ट्रक्शन के नाम पंजीकृत करने का निर्देश

एनसीएलटी का एंटरटेनमेंट सिटी में अल्पांश हिस्सेदारी परमेश कंस्ट्रक्शन के नाम पंजीकृत करने का निर्देश

एनसीएलटी का एंटरटेनमेंट सिटी में अल्पांश हिस्सेदारी परमेश कंस्ट्रक्शन के नाम पंजीकृत करने का निर्देश
Modified Date: July 5, 2026 / 02:49 pm IST
Published Date: July 5, 2026 2:49 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भूटानी इंफ्रा ग्रुप की इकाई परमेश कंस्ट्रक्शन कंपनी लि. को राहत दी है। न्यायाधिकरण ने एंटरटेनमेंट सिटी लि. को परमेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम 4.26 प्रतिशत इक्विटी शेयर हस्तांतरण को पंजीकृत करने का निर्देश दिया है।

न्याधिकरण ने शेयरधारक समझौते के कथित उल्लंघन को लेकर संयुक्त उद्यम भागीदार यूनीटेक होल्डिंग की याचिका को खारिज कर दिया।

परमेश कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (पीसीसीएल) ने अल्पांश निवेशक आईआईआरएफ होल्डिंग्स वी लिमिटेड और विस्ट्रा आईटीसीएल (इंडिया) लि. से क्रमशः 3.70 प्रतिशत और 0.56 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था।

यूनीटेक होल्डिंग लि (यूएचएल) ने इस सौदे के खिलाफ एनसीएलटी में याचिका दायर की थी। उसका तर्क था कि इससे उसके ‘पहले इनकार का अधिकार और ‘कंपनी के संविधान/शेयरधारक समझौते’ के तहत 30 दिन के नोटिस की जरूरत का उल्लंघन हुआ है।

एनसीएलटी की दो-सदस्यीय पीठ ने कहा कि शेयर हस्तांतरण को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कंपनी की पूरी इक्विटी पूंजी का प्रस्तावित विनिवेश पूरा नहीं हुआ था।

पीठ ने माना कि दो अल्पांश शेयरधारकों द्वारा पीसीसीएल के पक्ष में शेयर का हस्तांतरण वैध था और एंटरटेनमेंट सिटी लि. (ईसीएल) के लिए जरूरी था कि वह पीसीसीएल का नाम अपने ‘पंजीकृत सदस्य’ में दर्ज करके इस हस्तांतरण को मान्यता दे।

एनसीएलटी ने कहा, ‘‘ ईसीएएल को अल्पांश शेयरधारकों द्वारा अपीलकर्ता (पीसीसीएल) को हस्तांरित किए गए शेयरों को अपीलकर्ता के नाम पर पंजीकृत करना चाहिए…।’’

भूटानी ग्रुप ने एंटरटेनमेंट सिटी से जुड़े मामले में आई कानूनी स्पष्टता का स्वागत किया है।

उसने कहा कि वह इस प्रतिष्ठित परियोजना के पुनर्विकास के लिए यूनिटेक तथा अन्य सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक सहयोग की दिशा में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भूटानी इंफ्रा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आशीष भूटानी ने कहा, “एनसीएलटी के हाल के आदेश से लंबे समय से चले आ रहे मामले में महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता आई है…।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एंटरटेनमेंट सिटी दिल्ली-एनसीआर की सबसे प्रतिष्ठित परियोजनाओं में से एक है। हमें विश्वास है कि यदि सभी पक्ष, विशेष रूप से यूनिटेक, साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं, तो इस परियोजना को भारत के सबसे प्रतिष्ठित मनोरंजन, पर्यटन और लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन के रूप में फिर से स्थापित किया जा सकता है।’’

भूटानी इंफ्रा के अनुसार इस निर्णय के बाद कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी उसकी इकाई परमेश कंस्ट्रक्शन की हो गयी है।

न्यायाधिकरण का यह आदेश दो याचिकाओं पर आया। एक याचिका में पीसीसीएल ने ईसीएल के शेयरधारक के तौर पर पंजीकरण के लिए दायर की थी। वहीं दूसरी याचिका यूनिटेक होल्डिंग लि. ने शेयर हस्तांतरण को अमान्य घोषित करने और विवादित शेयरों को खुद हासिल करने के लिए दायर की थी।

ईसीएल नोएडा में 147 एकड़ से अधिक के भूखंड पर ‘द ग्रेट इंडिया प्लेस’ मॉल और ‘वर्ल्ड्स ऑफ वंडर’ जैसे मनोरंजन पार्क का परिचालन करती है।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने 20 जनवरी 2020 को, यूनिटेक के मौजूदा निदेशक मंडल (बोर्ड) को हटा दिया और सरकार को सात सदस्यों वाला नया बोर्ड बनाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यूनिटेक और उसकी अनुषंगी कंपनियों के खिलाफ किसी भी कानूनी कार्रवाई या उसे लागू करने पर रोक भी लगा दी। साथ ही नए बोर्ड को समाधान रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया।

इसके बाद, न्यायालय ने नए प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया और स्पष्ट किया कि वह पूरे यूनिटेक ग्रुप के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होगा। साथ ही, उसे ग्रुप की कंपनियों में निदेशक और ट्रस्टी नियुक्त करने या हटाने का अधिकार भी दिया गया। यूनिटेक समूह में उसकी सभी सहयोगी कंपनियां, ट्रस्ट और अनुषंगी इकाइयां शामिल हैं।

इस विस्तारित अधिकार क्षेत्र के तहत, अगस्त 2023 में ईसीएल की इक्विटी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक सार्वजनिक बोली प्रक्रिया शुरू की गई। यही पीसीसीएल और यूएचएल के बीच शेयर हस्तांतरण विवाद की पृष्ठभूमि बनी।

पीसीसीएल को सफल बोलीदाता घोषित किया गया और उसने 14 दिसंबर 2023 को 1,347 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य पर चरणबद्ध तरीके से ईसीएल का 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए पक्के समझौते हस्ताक्षर किए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पीसीसीएल ने 28 मार्च 2024 को हुए शेयर खरीद समझौतों के तहत आईआईआरएफ होल्डिंग्स और विस्त्रा आईटीसीएल से शेयर खरीदे। इसके बाद डिपॉजिटरी प्रणाली के माध्यम से शेयरों का हस्तांतरण किया गया। इसके साथ एनएसडीएल के रिकॉर्ड में पीसीसीएल का स्वामित्व दर्ज हो गया।

यूएचएल ने इस हस्तांतरण को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यह लेन-देन शेयरधारक समझौतों और ‘कंपनी संविधान’ के तहत पहले इनकार के अधिकार, अनुपालन विलेख को लागू करने और पहले से सूचना देने की आवश्यकताओं से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

हालांकि, एनसीएलटी ने इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने पाया कि यूएचएल सहित सभी शेयरधारकों ने पहले ही सार्वजनिक बोली प्रक्रिया के माध्यम से ईसीएल की इक्विटी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया था और बाहरी निवेशकों को शेयर की पेशकश की थी।

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि अल्पांश शेयरधारकों ने वैध रूप से अपने शेयर पीसीसीएल को हस्तांतरित किए थे और ईसीएल को इस लेन-देन के बारे में सूचित किया था।

अशोक कुमार भारद्वाज और अतुल चतुर्वेदी की पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले में, यूएचएल समेत कंपनी के सभी शेयरधारक विनिवेश का फैसला किया और अपने शेयर बेचने की पेशकश की। दस्तावेज के अनुसार निवेशकों को शेयर बेचने की पेशकश की गई थी। इस तरह, जाहिर तौर पर, सभी शेयरधारकों ने पहले इनकार के अधिकार को छोड़ दिया था।’’

हालांकि, एनसीएलटी ने कहा, ‘‘सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जब आईआईआरएफ होल्डिंग्स और विस्ट्रा आईटीसीएल द्वारा पीसीसीएल के नाम पर हस्तांतरित शेयरों का पंजीकरण ‘टाला/अस्वीकार नहीं किया जा सकता’, ऐसे में प्रबंधन को यूनीटेक की भूमिका के संबंध में उचित सावधानी बरतनी चाहिए।

भाषा रमण योगेश

योगेश


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