औषधि, चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार के लिए बजट में वित्तपोषण ढांचे की जरूरत: उद्योग
औषधि, चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार के लिए बजट में वित्तपोषण ढांचे की जरूरत: उद्योग
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) स्वास्थ्य उद्योग ने आगामी केंद्रीय बजट में देश के भीतर नवाचार और शोध एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए एक व्यवस्थित वित्तपोषण ढांचे की मांग की है। उद्योग का मानना है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पाने के लिए इन क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान जरूरी है।
‘डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज’ के चेयरमैन सतीश रेड्डी ने कहा कि भारतीय फार्मा उद्योग अब मात्रा के बजाय गुणवत्ता एवं मूल्य-आधारित वृद्धि की तरफ बढ़ रहा है।
रेड्डी ने कहा, ‘यह क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने और 2047 तक 500 अरब डॉलर का उद्योग बनने की महत्वाकांक्षा रखता है। ऐसे में केंद्रीय बजट 2026 से मुख्य उम्मीद देशभर में नवाचार और आरएंडडी को मजबूत करने के लिए एक ‘व्यवस्थित वित्तपोषण ढांचा’ तैयार करने की है।’
उन्होंने कहा कि इससे कंपनियां उन्नत अनुसंधान को जटिल और उच्च मूल्य वाली उपचार पद्धतियों में बदलने में सक्षम होंगी और मरीजों तक इसकी पहुंच भी आसान होगी।
रेड्डी ने दवा क्षेत्र में नवाचार के लिए निरंतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने वाला एक ‘सहायक पारिस्थितिकी तंत्र’ बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख निकाय ‘मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एमताई) ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब गैर-संक्रामक बीमारियां, कैंसर, ट्रॉमा और गहन चिकित्सा की जरूरतें भारत में बीमारियों के बोझ का एक बड़ा हिस्सा हैं, यह बजट सरकार के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे, रोकथाम और टेक्नोलॉजी-आधारित देखभाल में और अधिक निवेश करने का एक अहम मौका है।’’
एमताई के चेयरमैन पवन चौधरी ने कहा, ‘‘उद्योग को उम्मीद है कि इस बजट में इन जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य हर भारतीय के लिए सुलभ और सस्ता हो सके।’
चौधरी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई) के तहत पांच लाख रुपये के कवर से अस्पताल में इलाज की पहुंच बढ़ी है। अब बीमा के दायरे में प्रभावी चिकित्सा प्रक्रियाओं को शामिल करने से मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, ‘पॉली मेडिक्योर’ के प्रबंध निदेशक हिमांशु बैद ने कहा कि चिकित्सा-प्रौद्योगिकी (मेडटेक) क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागत कम करने और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘कर ढांचे में सुधार के साथ इस क्षेत्र को अनुसंधान और बुनियादी ढांचे में सरकारी निवेश की जरूरत है। बजट में 1,000 करोड़ रुपये का ‘मेडटेक रिसर्च फंड’ बनाने से स्वदेशी उत्पादों के विकास और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।’
बैद ने बताया कि तैयार उत्पादों पर पांच प्रतिशत और कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी की वजह से ‘उल्टा शुल्क ढांचा’ बन गया है। इससे निर्माताओं का पैसा टैक्स क्रेडिट के रूप में फंस जाता है और उनके कामकाज के लिए पूंजी का संकट पैदा होता है।
बॉश एंड लॉम्ब के प्रबंध निदेशक और एमताई के निदेशक संजय भूटानी ने कहा कि स्वास्थ्य बजट का एक बड़ा हिस्सा खासकर छोटे एवं मझोले शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा और जांच क्षमता को मजबूत करने पर खर्च होना चाहिए।
उन्होंने बीमारियों से बचाव संबंधी सेवाओं (निवारक सेवाओं) में निवेश की जरूरत बताई, ताकि भविष्य में इलाज पर होने वाले भारी खर्च को कम किया जा सके।
भूटानी ने कहा कि भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और कुशल कार्यबल में निवेश जरूरी है। साथ ही शिक्षा और स्कूल बुनियादी ढांचे पर निरंतर निवेश से भविष्य की जरूरतों के लिए कार्यबल तैयार किया जा सकेगा।
भाषा सुमित रमण प्रेम
प्रेम


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